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झज्जर में भीमेश्वरी देवी मेला संपन्न, दूधिया रोशनी में नहाया माता का मंदिर

माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में लगा नवरात्र मेला शांतिपूर्ण माहौल के बीच वीरवार को संपन्न हो गया है। मेले के आखिरी दिन अष्टमी तक माता के लाखों श्रद्धालुओं ने मंदिर में माता के दर्शन कर उनसे आशीर्वाद लिया और मन्नत भी मांगी। रात के समय मंदिर पूरी तरह से दूधिया रोशनी से नहाया रहा। मां के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी। हर जगह मां के जयकारे गूंज रहे थे। मेले के समापन वाले दिन बेरी कस्बा पूरी तरह धार्मिक नगरी में तबदील नजर आया। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन को सुबह से रात तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। जिला बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्ष एवं डीसी स्वप्निल रविन्द्र पाटिल की धर्मपत्नी स्वप्निल मोहिनी पाटिल के अलावा बेरी एसडीएम व श्राइन बोर्ड की सीईओ रेणुका नांदल ने सुबह आरती में शामिल होकर पूजा-अर्चना की। उसके बाद मेले में व्यवस्थाओं का जायजा लिया। वहीं झज्जर से विधायक गीता भुक्कल भी माता के दर्शन के लिए पहुंची। वीरवार देर शाम को जहां मां भीमेश्वरी देवी का मेला संपन्न हुआ, वहीं एशिया का पुष्कर के बाद सबसे बड़ा गधा-घोड़ा मेले का भी समापन हुआ। दोनों मेले में देश व प्रदेश के कोने-कोने से लोग आए। भीड़ को देखते सुबह तीन बजे माता को बाहर मंदिर में लाया गया नवरात्र में रोजाना मां को सुबह साढ़े चार बजे बाहर वाले मंदिर में लाया जाता है। परंतु अष्टमी के दिन माता को सुबह तीन बजे बाहर वाले मंदिर में लाया गया। मंदिर के पुजारी ने मंत्रोच्चारण के साथ मां को स्नान करवाकर आरती की गई। सप्तमी व अष्टमी को मां भीमेश्वरी देवी मदिंर में लाखों श्रद्धालुओं ने शीश नवाया और मां से आशीर्वाद प्राप्त किया। अष्टमी की आरती का अलग महत्व मंदिर के पुजारी कुलदीप वशिष्ठ ने बताया कि नवरात्रों में अष्टमी की आरती का अलग महत्व होता है और लाभ भी मिलता है। उन्होंने बताया कि पूरे संसार में मां भीमेश्वरी का इकलौता मंदिर हैं जहां मां की मूर्ति एक हैं मां दो मंदिरों में विराजमान होती है। मां को सुबह बाहर वाले मंदिर में लाया जाता हैं। जमकर की खरीदारी माता भीमेश्वरी देवी के मंदिर परिसर में लगे मेले में माता के दर्शन के लिए आए भक्तों ने अपने बच्चों के लिए खिलौने आदि की जमकर खरीदारी की। वहीं महिलाओं ने श्रृंगार व घरेलू सामान की भी खरीदारी की। महिलाएं अपने परिजनों के साथ मंगल गीत गाते हुए माता के दर्शन लिए मंदिर में पहुंची।

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