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चरखी दादरी: दो महीने में तीन बार ग्रैप की पाबंदियां लागू होने से लगातार कम हो रहा निर्माण सामग्री का कारोबार

दिल्ली व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण के चलते लगातार ग्रैप की पाबंदियों के कारण क्षेत्र में निर्माण सामग्री विक्रेताओं के कारोबार पर विपरित प्रभाव पड़ रहा है। एक तरफ जहां निर्माण कार्य बंद हो जाते हैं वहीं निर्माण सामग्री के भाव भी बढ़ जाते हैं। लंबे समय तक सामग्री का भंडारण रहने से विक्रेताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थानीय भवन निर्माण सामग्री विक्रेताओं ने सरकार से बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए गंभीरता के साथ विचार करने की मांग की है, जिससे आम आदमी पर ग्रैप की पाबंदियों का असर न पड़े और किसी का कारोबार प्रभावित न हो। विक्रेताओं का कहना है कि ग्रैप-4 की पाबंदियां लागू होने से निर्माण सामग्री विक्रेताओं के अलावा श्रमिकों, भराई करने वाले वाहन चालकों, राज मिस्त्री के काम पर काफी असर पड़ा है। यह वर्ग ऐसा है जो सुबह परिवार के भरण पोषण के लिए घर से निकलता है लेकिन काम न मिलने के कारण खाली हाथ घर लौटने को मजबूर होता है। बार-बार ग्रैप की पाबंदियां लागू होने से कारोबार लगातार कम होता जा रहा है। बढ़ते रेट देख कर ग्राहक को संतुष्ट करना काफी मुश्किल होता है। काम कम होने से दुकान का किराया व श्रमिकों को वेतन देने के लिए मुश्किल हो रही है। सरकार से अनुरोध है कि वो प्रदूषण को नियंत्रित कर हमारा कारोबार शुरू करवाए। -- नवीन कुमार, भवन निर्माण सामग्री विक्रेता। ग्रैप पाबंदी लागू होने से एक आदमी ही नहीं बहुत से लोगों का काम प्रभावित हो रहा है। सरकार को बढ़ते वायु प्रदूषण पर विराम लगाने के लिए ग्राउंड लेवल तक पहुंचने की जरूरत है, ताकि ग्रैप का प्रभाव आम आदमी पर नहीं पड़े। ग्रेप-4 लगने से ईंटों के भाव भी आसमान छू रहे हैं।

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