इरीगेशन एसोसिएशन आफ इंडिया तथा हरियाणा इरीगेशन एसोसिएशन द्वारा भिवानी जिला के तोशाम कस्बा में आयोजित तीन दिवसीय सूक्ष्म सिंचाई मेले में प्रदेश भर के किसान सिंचाई की विभिन्न नई तकनीकों को सीखने के लिए पहुंच रहे है। यहां लगाई गई प्रदर्शनी में 80 के लगभग स्टॉलों के साथ नवीनतम तकनीकों से युक्त सूक्ष्म सिंचाई के यंत्र प्रदर्शन के लिए रखे गए है। जिनकी जानकारी किसान उठा रहे हैं। सूक्ष्म सिंचाई वह विधि है, जिसमें कम से कम पानी में अधिक से अधिक उत्पादन लिया जाता है। इसके साथ ही फर्टिलाईजर का प्रयोग भी कम से कम रहता है। इससे किसान की लागत कम आती है तथा उसका उत्पादन बढऩे से किसान की आय में वृद्धि होती है। सूक्ष्म सिंचाई मेले के दूसरे दिन मेले में जुटे किसानों ने बताया कि उन्होंने मेले में पहुंचकर यहां प्रदर्शित किए जा रहे मिनी शिप्रिकंलकर रॉड, फ्लश वॉल, एचडीपीई पाईप, मिनी ट्यूब, सर्विस शैडल, पीतल व जिंक नोजल, रेन गन सहित कृषि में उपयोग होने वाले यंत्रो के बारे में जानकारी ली। उनका कहना है आज के समय में आधुनिक सिंचाई प्रणालियां जैसे मिनी स्प्रिंकलर और ड्रिप सिस्टम किसानों के लिए बहुत लाभकारी साबित हो रही हैं। इस मौके पर गांव खावा के किसान सतबीर का कहना है कि इनसे पानी की बचत होती है, मेहनत कम लगती है और फसल को समय पर उचित मात्रा में पानी मिलता है, जिससे पैदावार में भी बढ़ोतरी होती है। इसलिए यह एक बहुत ही उपयोगी और प्रभावी प्रणाली है, जिसे अपनाने से किसानों को अच्छा लाभ मिल रहा है। वही गांव नागल के किसान का कहना है कि दिन प्रतिदिन जमीन का पानी काफी नीचे चला गया है। पानी की काफी कमी हो गई है। ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है, कम पानी में बेहतर खेती कैसे की जाए। उन्होंने कहा कि अगर हम पारंपरिक तरीके से खेतों में पानी देते हैं, तो न सिर्फ पानी की बर्बादी होती है, बल्कि समय भी ज्यादा लगता है। वहीं अगर हम मिनी स्प्रिंकलर या ड्रिप तकनीक का उपयोग करें, तो इससे समय की बचत होती है और हर फसल को समय पर और सही मात्रा में पानी मिलता है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। किसानों को लगभग 15 से 20 प्रतिशत तक अधिक लाभ मिलता है, और कई फसलों में यह लाभ इससे भी ज्यादा हो सकता है।