दीवार पर टंगी पेंटिंग ने एक अलग कहानी बुनना शुरू ही किया था कि तभी कलाकार ने कहा ये भाषा है। एक तरफ जहां कई इमारतों के बीच से निकलता धूंधला सागर बता रहा था कि वो सरल हैं इसलिए सरलता से कोई भी आकार ले सकता है। वहीं दूसरी तरफ उन इमारतों में कैद लोगों की वेदना बता रही थी कि सपने बहने वाले हैं। ये सब कुछ इंडिया हैबिटेट सेंटर के द स्टेन सभागार में आयोजित एक अनोखी कला प्रदर्शनी में देखने को मिला। इस कला प्रदर्शनी की सूत्रधार अनीता गोयल थीं, जो कि स्वत्रंता सैनानियों में से एक लाला लाजपत राय के घराने से आतीं हैं। उन्होंने प्रदर्शनी के जरिए रंगों के कई आयामों को दर्शाया। दिवारों पर लगी हर एक पेंटिंग एक अलग ही कहानी बयां कर रही थी। मानों अगर कलाकार मौजूद न हो तो दर्शक अपनी सहूलियत से अलग-अलग जिंदगियों के कई किस्से बुन सकता है। कौन है अनीता गोयल अनीता गोयल स्वत्रंता सैनानियों में से एक लाला लाजपत राय की परपोती हैं। उन्होंने फाइन आर्ट्स में स्नातक किया है और लगभग 40 वर्षों से रंगों की रंगीन दुनिया का हिस्सा हैं। ललित कलाओं में तकनीकी रूप से प्रशिक्षित, अनीता बचपन से ही एक उत्साही कलाकार रही हैं। रचनात्मक प्रवृत्ति की होने के कारण, उन्होंने हर उस चीज में हाथ आजमाया जिसमें डिजाइन तत्व की आवश्यकता होती थी। फूलों की सजावट से लेकर मेजपोशों की डिजाइनिंग तक। हालांकि उन्हें दीवार-कला से लेकर परिधानों और कस्टमाइज़्ड बिस्तर के लिनेन तक, विभिन्न कला माध्यमों में काफी अनुभव है। उन्होंने कई अंतर्राष्ट्रीय कार्यशालाओं में भाग लिया है और रंग, रेखा और कलात्मक गति के अपने ज्ञान को निखारा है।