दिल्ली नगर निगम के स्वामी दयानंद अस्पताल के डॉक्टरों ने दुर्लभ तंत्रिका रोग गुइलेन-बैरे सिंड्रोम से जूझ रहे 13 वर्षीय लक्षित को नया जीवन देकर चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। आठ महीने तक आईसीयू में भर्ती रहे इस बच्चे को इलाज के दौरान तीन बार कार्डियक अरेस्ट आया और करीब तीन महीने तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। लगातार उपचार और चिकित्सकीय टीम के समर्पित प्रयासों के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने पैरों पर चलने लगा है।