अपना पूरा जीवन मानव सेवा को समर्पित करने वाले 15 अप्रैल, 1563 को गोइंदवाल साहिब, तरनतारन, पंजाब में जन्मे सिख धर्म के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी ने मुगल सम्राट जहाँगीर के शासनकाल में वर्ष 1606 में अपनी शहादत से इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय रच दिया था। गुरु अर्जुन देव जी की शहादत को ही गुरु अर्जुन देव शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को सिख समुदाय, बलिदान और आस्था का प्रतीक मानते हैं। इस दिन जगह जगह मीठे पानी की छबील लगाई जाती है। दिल्ली के राजेंद्र नगर स्थित गुरुद्वारा नानक सर के बाहर मीठा शरबत बांटा गया।