यहां सबसे अधिक महिलाएं ही नजर आ रही हैं। शिक्षा ही समाज को सशक्त बनाती हैं। जर्मनी में सबसे अधिक पीएचडी हो रही थी। उस समय जर्मनी ने हिटलर को जन्म दिया। भारत में 1947-48 में साक्षरता दर 17 प्रतिशत से भी नीचे थी। उसके बाद भी हमने महात्मा गांधी दिए। यह बातें नॉलेज पार्क स्थित जीएनआईओटी इंस्टीट्यूशंस ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज में आयोजित पीजीडीएम बैच 2023-25 का दीक्षांत समारोह में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहीं। दीक्षांत समारोह के दौरान संस्थान के 290 से अधिक विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा जीवन में बदलाव लाती है। शिक्षा के साथ छात्रों को संस्कार देने होंगे। भारत की पहचान सभ्यता से ही होती है। विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता, रणनीतिक सोच, व्यावसायिक दक्षता और नैतिक मूल्यों से भी सशक्त करना होगा। उन्होंने कहा कि डिग्री प्राप्त करने का नहीं, बल्कि शैक्षणिक जीवन की एक महत्वपूर्ण यात्रा के सफल समापन और व्यावसायिक जीवन की नई शुरुआत का प्रतीक है। पीजीडीएम जैसे चुनौतीपूर्ण और व्यावसायिक पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूर्ण करना विद्यार्थियों के सतत परिश्रम, अनुशासन और संकल्प का परिणाम है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्वदेश कुमार सिंह ने कहा कि लगातार छात्रों का कारवां बढ़ता जा रहा है। हम शिक्षा के साथ छात्रों को संस्कार भी दे रहे हैं,जिससे देश के निर्माण में वह सहयोग कर सके। इस मौके पर नागेन्द्र नाथ त्रिपाठी, डॉ. राजेश कुमार गुप्ता,गौरव गुप्ता, डॉ. भूपेन्द्र कुमार सोम आदि मौजूद रहे।