आप संयोजक के आरोप पर पूर्व सांसद ने किया पलटवार, कहा-11 साल में बिरादरी नहीं दिखी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आरोप पर भाजपा के पूर्व सांसद व जाट नेता प्रवेश वर्मा ने पलटवार किया। प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि केजरीवाल की राजनीतिक जमीन खिसक गई है। 11 साल में उन्हें जाट बिरादरी नहीं दिखी। चुनाव आते ही उन्हें अब जाट याद आ रहे हैं। दिल्ली देहात के लोगों को अपना शीश महल तक दिखाने में ऐतराज करने वाले केजरीवाल ने मुख्यमंत्री रहते हुए कभी गांव का दौरा तक नहीं किया। दिल्ली देहात के लिए एक भी काम नहीं किया। पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा की समाधि बनाने के लिए लिखे गए पत्र तक का जवाब तक नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि बाहरी दिल्ली में आने वाले 28 विधानसभा क्षेत्रों में आप हार रही है। लोगों ने बैठक कर आप को वोट नहीं देने का निर्णय लिया है। दिल्ली देहात में जाट के साथ ही गुर्जर, यादव, राजपूत, त्यागी सहित 36 बिरादरी के लोग आप के खिलाफ मतदान करेंगे। केजरीवाल ने देश के लिए बहादुरी दिखाने वाले जाट समुदाय के लोगों का विरोध किया है। जाट ही नहीं अन्य सभी जातियों का भी अपमान किया। काले झंडे दिखाने के लिए दिल्ली देहात के लोग तैयार हैं। दिल्ली में पहली बार जाट मुख्यमंत्री डॉ. साहिब सिंह को भाजपा ने ही बनाया था। देशद्रोही कहकर देशभक्त जाटों का अपमान केजरीवाल ने किया है। उनकी सियासी चाल को जाट समाज बखूबी समझ रहा है। इस बार उन्हें नई दिल्ली सीट छोड़नी पड़ेगी। जमानत जब्त कराने के लिए तैयार रहें।
केजरीवाल का जाट प्रेम केवल घड़ियाली आंसू : बिधूड़ी
भाजपा सांसद व गुजर नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि जाट प्रेम दिखाकर केजरीवाल चुनाव में घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। उन्हें यह शायद मालूम नहीं है कि दिल्ली में जाटों को आरक्षण 1993 में बनी भाजपा सरकार ने ही दिया था। दिल्ली देहात की लगातार उपेक्षा के कारण गांवों में जाटों समेत सभी जातियों के लोगों ने केजरीवाल से दूरी बना ली है।
उन्होंने कहा कि 1993 में जब दिल्ली में भाजपा सरकार बनी थी तो उन्होंने खुद भी जाट समाज के आग्रह पर विधायक के रूप में सरकार से अनुरोध किया था कि जाटों को ओबीसी में शामिल किया जाना चाहिए। इसके बाद भाजपा सरकार ने यह फैसला लिया था। केजरीवाल बताएं कि आखिर दस साल में कितने जाट युवकों को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई गई। दिल्ली में जाटों के करीब 200 गांव हैं, जहां अधिकतर लोग खेती पर ही निर्भर हैं, लेकिन दिल्ली के किसानों के साथ केजरीवाल ने जो सौतेला व्यवहार किया है, वह किसी से छिपा नहीं है। इन गांवों के किसान ही केजरीवाल से यह पूछना चाहते हैं कि उन्होंने केंद्र में मोदी की सरकार की किसान कल्याणकारी योजनाओं को दिल्ली में लागू क्यों नहीं होने दिया? उन्होंने किसानों को सस्ती दरों पर खेती के लिए बिजली उपलब्ध क्यों नहीं कराई, जबकि हरियाणा के किसानों को यह सुविधा मिलती है? दिल्ली के किसानों से बिजली के कॉमर्शियल रेट वसूल किए जाते हैं। ट्रैक्टर को कॉमर्शियल वाहन घोषित क्यों किया? दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा दिल्ली में किसानों के सर्वप्रिय नेता रहे हैं और केजरीवाल से बार-बार अनुरोध किया गया कि किसी संस्थान का नाम उनके नाम पर करें, लेकिन उन्होंने ऐसा करना उचित नहीं समझा।