क्रिकेट में कुछ कहानियां सिर्फ स्कोरकार्ड पर नहीं लिखी जातीं, वे दिलों में दर्ज हो जाती हैं। ईशान किशन की वापसी भी ऐसी ही कहानी है झटके, इंतज़ार, आत्ममंथन और फिर धमाकेदार लौटना। दिसंबर 2023 में टीम से बाहर होने के बाद जब दिसंबर 2025 में उन्होंने दोबारा भारतीय टी20 स्क्वॉड में जगह बनाई, तो सवाल कई थे। लेकिन जवाब उन्होंने बल्ले से दिया वह भी सबसे बड़े मंच पर, पाकिस्तान के खिलाफ।
टी20 विश्व कप 2026 में पाकिस्तान के विरुद्ध मुकाबला… दबाव, उम्मीद और इतिहास सब साथ थे। कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम की लंबी बाउंड्री, 70+ मीटर साइड और 80+ मीटर सामने। लेकिन ईशान के इरादे उससे भी बड़े निकले। उन्होंने सिर्फ 27 गेंदों में अर्धशतक ठोक दिया सात चौके, दो छक्के और 185 का स्ट्राइक रेट। पावरप्ले में उनके व्यक्तिगत 42 रन भारत-पाक टी20 मुकाबलों में अब तक का सर्वोच्च आंकड़ा बन गए, उन्होंने शुभमन गिल के 35 रनों का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया।
जब पाकिस्तान के प्रीमियम तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी तीसरे ओवर में आए, तो ईशान ने दो चौके और एक छक्का जड़कर संदेश दे दिया यह कमबैक है, बयान नहीं। फिर सैम अयूब और अबरार अहमद पर भी हमला जारी रहा। 40 गेंदों में 10 चौके और तीन छक्कों की मदद से 77 रन यह सिर्फ पारी नहीं, आत्मविश्वास की वापसी थी।
भारत-पाक टी20 इतिहास में सबसे तेज अर्धशतक की सूची में ईशान तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। शीर्ष पर अब भी मोहम्मद हफीज हैं, जिन्होंने 2012 में अहमदाबाद में 23 गेंदों में फिफ्टी जड़ी थी। 24 गेंदों में अर्धशतक का कारनामा 2025 में दुबई में अभिषेक शर्मा ने किया था। वहीं 29 गेंदों में फिफ्टी का रिकॉर्ड युवराज सिंह के नाम दर्ज है। 77 रन की इस पारी के साथ ईशान भारत-पाक मैचों में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर करने वालों की सूची में कोहली और रिजवान के बाद चौथे स्थान पर आ गए।
कमबैक के बाद ईशान का बल्ला लगातार बोल रहा है। पाकिस्तान के खिलाफ 77 रन से पहले उन्होंने नामीबिया के विरुद्ध 61, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 53 और न्यूजीलैंड के खिलाफ 103 रन की शतकीय पारी खेली। छोटी पारियां भी आईं, लेकिन बड़े स्कोर मैच का रुख बदलते रहे। वापसी के बाद 426 रन इस बात का सबूत हैं कि ईशान सिर्फ टीम में लौटे नहीं हैं, बल्कि निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
दिसंबर 2023 वह मोड़ था, जब सब कुछ ठहरता सा लगा। निजी कारणों से ब्रेक लेने के बाद उन्हें केंद्रीय अनुबंध से बाहर कर दिया गया। यह फैसला इसलिए चौंकाने वाला था क्योंकि एक साल पहले ही उन्होंने वनडे में दोहरा शतक जड़ा था और ऋषभ पंत की गैरमौजूदगी में वह भारत के प्रमुख विकेटकीपर-बल्लेबाज थे। लेकिन अगले दो साल उन्होंने शिकायत में नहीं, तैयारी में बिताए।
दिसंबर 2025 में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में झारखंड को पहला खिताब दिलाकर ईशान ने चयनकर्ताओं को जवाब दिया। करीब 197 के स्ट्राइक रेट से टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन यही प्रदर्शन उन्हें विश्व कप टीम तक ले गया। घरेलू क्रिकेट दलीप ट्रॉफी, रणजी, विजय हजारे सब उनकी वापसी की सीढ़ियां बने। आईपीएल 2025 में भी उन्होंने संतुलित प्रदर्शन किया।
पूर्व झारखंड बल्लेबाज ईशांक जग्गी का मानना है कि ईशान अब पहले से ज्यादा परिपक्व हैं। असफलताओं से डरने के बजाय उन्होंने उन्हें चुनौती बनाया। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उनकी कप्तानी आक्रामक फैसले, निडर फील्ड सेटिंग और खिलाड़ियों पर भरोसा ने उनके नेतृत्व गुणों को भी उजागर किया। 2016 में अंडर-19 विश्व कप में भारत की कप्तानी कर चुके ईशान अब एक परिपक्व नेता की तरह दिखते हैं।
क्रिकेट में वापसी आसान नहीं होती। खासकर तब, जब मंच भारत-पाक मुकाबला हो। लेकिन ईशान किशन ने दिखा दिया कि अगर जज्बा जिंदा हो, तो वक्त चाहे जितनी परीक्षा ले अंत में कहानी वही लिखता है, जो खुद पर भरोसा रखता है।