कबीरधाम जिले की बेटी छोटी मेहरा ने अपने हौसले और मेहनत से यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। कवर्धा शहर के वार्ड क्रमांक 24 दर्रीपारा की रहने वाली छोटी मेहरा ने शारीरिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए पैरा-एथलेटिक्स के क्षेत्र में स्टेट से लेकर नेशनल स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। उनकी इसी उपलब्धि के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने वर्ष 2024 में उन्हें राज्य के प्रतिष्ठित ‘गुण्डाधूर सम्मान’ से सम्मानित किया।
करीब 6–7 वर्षों से पैरा-एथलेटिक्स के क्षेत्र में सक्रिय छोटी मेहरा ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को कभी नहीं छोड़ा। लगातार अभ्यास और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने खेल जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने विशेष रूप से गोला फेंक और चक्र फेंक प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। कई प्रतियोगिताओं में उन्होंने स्वर्ण और रजत पदक जीतकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। छोटी मेहरा ने बताया कि वे 2020-21 से खेल रही है। उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, माता-पिता का निधन हो चुका है। उसका भाई ठेले में चाय दुकान लगाया है, जहां से इन लोगों की जीवन चलती है।
बेटियों के लिए बनी प्रेरणा
कबीरधाम जिले के एक छोटे से वार्ड से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचना छोटी मेहरा की असाधारण मेहनत और जज्बे का परिणाम है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सपनों को पूरा करने के लिए परिस्थितियां नहीं, बल्कि मजबूत संकल्प और निरंतर प्रयास जरूरी होते हैं।आज छोटी मेहरा सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि नारी शक्ति, आत्मविश्वास और संघर्ष की प्रतीक बन चुकी हैं। उनकी कहानी उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखती हैं।