बालोद जिले के 502 राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारी पिछले आठ दिनों से हड़ताल पर हैं। त्योहारी सीजन में कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन भी खास रंग में दिखाई दिया। तीज पर्व के अवसर पर महिला कर्मचारियों ने धरना स्थल पर रंगोली बनाई और पारंपरिक ‘कड़ू भात’ खाकर पर्व मनाया। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार सिर्फ वादे करती है लेकिन मांगें हर बार फाइलों में दब जाती हैं। ज्ञापन से नहीं बनी बात संघ के जिलाध्यक्ष खिलेश कुमार साहू ने बताया कि अब तक 100 से अधिक बार ज्ञापन और पत्र सरकार को सौंपे गए, लेकिन हर बार उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा – “हमारा धैर्य अब जवाब दे चुका है। सरकार को दो महीने पहले ही अल्टीमेटम दिया गया था। 502 कर्मचारियों में से 374 महिला कर्मचारी हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराने लगी है, लेकिन सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंग रही।” 10 मांगों को लेकर हड़ताल एनएचएम कर्मचारी पिनेश्वर साहू ने बताया कि वे पिछले 20 वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने हुए हैं, कोविड-19 महामारी में भी उनकी भूमिका अहम थी, लेकिन आज भी उन्हें बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें – कर्मचारियों का संविलियन पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना ग्रेड पे निर्धारण लंबित 27% वेतन वृद्धि अनुकंपा नियुक्ति कम-से-कम 10 लाख का कैशलेस चिकित्सा बीमा नियमित सेवा संरचना सेवा अवधि की गिनती अवकाश और सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन अन्य वेतन व भत्ते में सुधार स्वास्थ्य सेवाओं पर असर हड़ताल के चलते जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो चुकी हैं। सरकारी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र और ग्रामीण क्षेत्रों की सेवाएं ठप हैं। टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम और जन-जागरूकता अभियान रुक गए हैं। हड़ताल में लैब टेक्नीशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) सहित विभिन्न संवर्ग के कर्मचारी शामिल हैं।