उत्तराखंड में आपदा से क्षतिग्रस्त हुए वनों में फिर से हरियाली की चार ओढ़ाने के लिए जापान आगे आया है। उत्तराखंड सरकार और जापान के विशेषज्ञों की देखरेख में फिर से वह जंगल हरे-भरे हो सकेंगे जो कि आपदा की भेंट चढ़ चुके हैं।
उत्तराखंड में जापान की मदद से उन वन पंचायतों में जंगल उगाया जाएगा, जहां पर आपदा के दौरान वनों की क्षति हुई है। जंगलात महकमे की ओर से प्रदेश के एक हजार ऐसे वन पंचायतों को चिह्नित किया गया है।
आठ साल में खर्च होंगे 655 करोड़ रुपये
इसको लेकर अगले आठ साल में 655 करोड़ रुपये की रकम खर्च की जाएगी। इसके जरिये स्थानीय लोगों को आजीविका से भी जोड़ा जाएगा, जिससे उनके पलायन को रोका जा सकें। जापान द्वारा अप्रैल 2014 से वित्तीय मदद देने का सिलसिला शुरू कर दिया जाएगा।
प्रदेश में 12 हजार वन पंचायतें है। इसमें से एक हजार उन वन पंचायतों का चयन किया गया है, जहां जंगलों की स्थिति दयनीय हो गई है। उन जंगलों को पुराने स्वरूप में लौटने के लिए जापान वित्तीय मदद देने को तैयार है।
शुक्रवार को मंथन करेगी जापानी टीम
इसको जंगलात महकमे की ओर से 655 करोड़ रुपये का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) किया गया है। इस डीपीआर का जापान की टीम के सामने शुक्रवार को मंथन सभागार में प्रजेंटेशन दिया गया। इस डीपीआर को लेकर जापान की टीम मौके पर अगले तीन माह तक चेक करेगी।
इसके बाद जो भी संशोधन होगा, उसे दिसंबर तक में ठीक किया जाएगा। मार्च 2013 तक जापान, केंद्र और उत्तराखंड सरकार के बीच एमओयू हो जाएगा। उत्तराखंड जंगलात महकमे की ओर से 655 करोड़ के अलावा 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग की गई है।
यह रकम उत्तराखंड में आपदा के दौरान उक्त वन पंचायतों में खर्च की जाएगी। जंगल उगाने के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों की मदद से एक हजार वन पंचायतों के ग्रामीणों को रोजगार भी दिलाया जाएगा, जिससे उन्हें गांव से मजबूरी में बाहर न जाना पड़े। महकमे की ओर से एक हजार हेक्टेयर वन भूमि में फिर से जंगल उगाने का लक्ष्य तय किया गया है।
क्या कहतें हैं अधिकारीः
प्रदेश के लिहाज से यह बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद गंभीरता से काम किया जा रहा है, जिससे जंगल तो बढ़े ही। साथ ही लोगों को रोजगार भी मिल सकें।
- डा.आरबीएस रावत, प्रमुख वन संरक्षक