हर कोई कुदरत की निष्ठुरता पर स्तब्ध है...एक के बाद एक आपदाओं में जिंदगियां दम तोड़ रही हैं, जिसमें इंसान प्रकृति के आगे भिखारी बन खाली मांग भर ही पा रहा है। ऐसा ही एक स्तब्ध कर देने वाला पल उस वक्त घाट पर नजर आया जब एक ही परिवार के सात सदस्यों की चिताएं सजी।
उत्तराखंड के चमोली जिले में पोखरी ब्लाक के भिकोना गांव की चार चिताएं और तीन बच्चों के शव जब यहां संगम घाट पर अंतिम संस्कार के लिए आए तो मातम छा गया।
इस विभत्स तस्वीर को देखने वाली हर आंख छलक रही थी तो हर दिल जार जार रो रहा था। मानो हर कोई भगवान को कोसते हुए कह रहा हो ओ आसमान वाले जमीं पर उतर कर तो देख कि तूने क्या छीन लिया...
बज्रपात से एक ही घ्ार के सात सदस्यों की मौत
मंगलवार की रात जब बज्रपात से भिकोना गांव में एक परिवार के सात सदस्यों की जिंदगी तबाह हो गई तो हाल ही में केदारघाटी के बाद हुए इस हादसे से पूरा जिला सन्न हो गया। सबकी जुबां पर कुदरत की लिष्ठुरता के चर्चे थे और मन में भारी संवेदनाएं।
बुधवार अपराह्न दो बजे सातो शवों को जब यहां संगम घाट पर अंतिम संस्कार के लिए लाया गया तो अमर उजाला की टीम भी श्रद्धाजंलि देने घाट पंहुची। लेकिन यहां रखे परिवार के मुखिया सज्जन लाल और उनकी पत्नी पूर्णी देवी, बड़ा बेटा संजय और उसकी पत्नी नीलम का शव देख मन भावुक हो उठा।
बराबर में रखे संजय और नीलम की तीन बेटियां तृष्टि 5, श्रृष्टि 3 और कामिनी 2 का शव देख आंखें छलक उठी। पत्रकार का फर्ज निभाने की कोशिश इस गमगीन माहौल में ही की। घाट पर मृतकों के रिश्तेदार जीतेंद्र कुमार ने बताया कि मंगलवार की रात इस परिवार पर कहर बनकर टूटी।
क्षेत्रीय विधायक पर जताई नाराजगी
लेकिन दूसरे ही पल शख्त होकर उन्होंने प्रशासन और क्षेत्रीय विधायक पर नाराजगी जताई और कहा कि प्रशासन केवल यहां पर लकड़ियां और तेल रखने तक सीमित रहा। क्षेत्रीय विधायक ने तो गांव आकर जायजा लेना भी उचित नहीं समझा।
मृतक परिवार के एक अन्य रिश्तेदार संदीप कुमार ने बताया कि इस परिवार में सिर्फ एक ही सदस्य सज्जन लाल का छोटा बेटा विजेंद्र कुमार देहरादून में रहता है। जिस कारण वो बच गया।
और जब जलने लगी चिताएं
हमने विजेंद्र से बात करने की कोशिश की। लेकिन अपने पूरे परिवार को गंवा चुका विजेंद्र इस हालात में ही नहीं था। विजेंद्र द्वारा अपने पूरे परिवार का अंतिम संस्कार करने पर यहां मौजूद सभी लोगों की आंखें भावुक हो उठी।
हर चिता पर जाकर विजेन्द्र ठिठक जाता तो लोग ढांढस बंधाकर कर्म पूरा करवाने के लिए आगे आ जाते। कुदरत के रोष ने सबको बेबस कर दिया है, आसमान में घिरते बादल हर किसी को अब डराने लगे हैं। इलाकेभर में एक अजीब सी खामोशी पसर गई है।