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सिर्फ 2700 रुपये के सहारे छोड़ दिया प्रभावितों को

Sun, 23 Jun 2013 04:43 PM IST
कर्णप्रयाग/विनय बहुगुणा
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पिंडरघाटी में 16 और 17 जून को आपदा की मार से बेहाल प्रभावित अब भी जीआईसी और जीजीआईसी में शरण लिए हुए हैं। आशियाने और रोजगार गंवा चुके इन लोगों को अब भविष्य की चिंता सता रही है।
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लेकिन हालात कहीं से भी दिलासा देते नजर नहीं आ रहे हैं। प्रभावितों की हालत इस कदर है कि प्रशासन ने त्वरित मदद के नाम पर सिर्फ 27 सौ रुपये, एक-एक कंबल और टैंट के सहारे छोड़ दिया है।

हिला कर रख दिया जीवन चक्र
प्रशासन द्वारा अभी तक ऐसा कोई ठोस प्रयास अभी तक नहीं हो पाया, जिससे इन लोगों में कोई आस जगे। पिंडरघाटी में पिंडर नदी के ऊफान ने देवाल से लेकर नारायणबगड़ तक जीवन चक्र को हिला कर रख दिया। कई परिवार बेघर हो चुके हैंपूरे क्षेत्र में 70 से अधिक परिवार बेघर हो चुके हैं। आपदा पीड़ित कैंप और सगे-संबंधियों के यहां रह रहे हैं।
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नारायणबगड़ में अपनी पांच दुकानें और घर आपदा में गंवा चुके बीएस रावत ने बताया कि आपदा के बाद राजस्व विभाग ने निरीक्षण किया था। फिर प्रशासन ने लोगों को 27 सौ रुपये राहत राशि दी। लेकिन अब उन्हें उनके भाग्य पर छोड़ दिया गया है।

उर्मिला मेहरा कहती है आपदा ने बच्चों के भविष्य को भी लील लिया है। स्कूल खुलने को सप्ताहभर का समय रह गया है। लेकिन इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रयास नहीं हो रहा है।

प्रशासन का रवैया उपेक्षित
जयवीर कंडारी, भगत सिंह नेगी का कहना है कि प्रभावितों को रुपये, पैसे नहीं, बल्कि शासन, प्रशासन का विश्वास चाहिए। जिससे वे अपना जीवन दोबारा शुरू कर सकें। प्रभावित गंगा सिंह रावत, बृजभूषण, हरेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, सबर सिंह, कर्ण सिंह आदि का कहना है कि अभी तक तो प्रशासन का रवैया उपेक्षित ही रहा है।

दोबारा हालचाल पूछने की किसी भी अधिकारी ने जरुरत नहीं समझी है। उधर तहसील मुख्यालय थराली में 34 आवासीय मकान और दुकानें पिंडर में समा चुकी हैं। लेकिन यहां भी प्रभावित भगवान भरोसे हैं। प्रशासन ने मस्जिद मार्केट और मुस्लिम बस्ती को खाली करने के निर्देश तो दे दिए हैं। लेकिन इन लोगों को कहां शिफ्ट किया जाए, इसका निर्णय नहीं लिया है।

देवाल ब्लाक के ओडर, लिंगणी, तोरती, हरमल, रामपुर ग्राम पंचायतों का ब्लाक और तहसील से संपर्क कटा हुआ है। लेकिन यहां आज तक प्रशासन का कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा है।

खाद्यान्न संकट गहरा गया
सबसे बड़ी समस्या है कि इन गांवों में खाद्यान्न संकट गहरा गया है। ग्रामीण घर के अनाज से ही जीवन यापन करने को मजबूर है। रोजमर्रा के उपयोग के कई चीजें खत्म हो गई हैं। इसके साथ ही पिंडर नदी के दूसरी ओर कैसे पहुंचे, इसके लिए वैकल्पिक इंतजाम नहीं हो पाए हैं।

प्रशासन की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है। सिर्फ त्वरित सहायता मिली है, वह भी कस्बों में बांटी गई है। गांवों में कोई अधिकारी नहीं पहुंचा है। लोगों का जीवन अब सिर्फ भगवान भरोस है।
- सुशील रावत, पूर्व प्रमुख थराली

ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार संपर्क किया जा रहा है। ओडर सहित अन्य गांवों का निरीक्षण किया जा रहा है। प्रयास किए जा रहे हैं कि वैकल्पिक रास्तों से इन गांवों तक राशन पहुंचाया जाय। मुस्लिम बस्ती और मस्जिद मार्केट को खाली करने को कहा गया है। यहां के लोगों जीआईसी थराली व तलवाड़ी में शिफ्ट किया जा रहा है।
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- विवेक प्रकाश, उप जिलाधिकारी थराली
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