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शीतकालीन चारधाम यात्रा का प्रचार-प्रसार नहीं

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जिले में शीतकालीन चारधाम यात्रा की योजना प्रचार-प्रसार और ढांचागत सुविधाओं के अभाव में परवान नहीं चढ़ पा रही है। पिछले साल कोरोना महामारी के चलते बाधित रही चारधाम यात्रा के बाद शीतकालीन यात्रा पर फोकस किया जाए, तो वर्तमान समय में हरिद्वार महाकुंभ में पहुंच रहे तीर्थयात्रियों को भी इस यात्रा पर आमंत्रित किया जा सकता है।
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राज्य में वर्ष 2010-11 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने चारधाम के शीतकालीन पड़ावों तक तीर्थयात्रियों के लिए शीतकालीन यात्रा शुरू करने की घोषणा की थी। चारधामों में महत्वपूर्ण दो धामों गंगोत्री और यमुनोत्री वाले जनपद में भी योजना से तीर्थपुरोहितों के साथ यात्रा मार्ग पर स्थित होटल कारोबारियों व छोटे व्यवसायियों को बड़ी उम्मीदें जगी थी। शुरूआती दौर में अच्छी तादात में तीर्थयात्री गंगोत्री के शीतकालीन पड़ाव मुखबा और यमुनोत्री के खरसाली तक पहुंचे थे, लेकिन एक दो साल बाद ही प्रचार-प्रसार और शीतकालीन पड़ावों में ढांचागत सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिए जाने के चलते योजना कागजों में ही सिमट कर रह गई है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र मटूड़ा का कहना है कि धामों में दूरसंचार, सड़क जैसी ढांचागत सुविधाओं का अभाव है। यमुनोत्री मार्ग पर डबरकोट भूस्खलन क्षेत्र का ही उपचार नहीं हो पाया है।
क्या कहते हैं तीर्थपुरोहित
यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव जगमोहन उनियाल का कहना है कि शीतकालीन पड़ावों तक सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं जुटाई जाए, तो यात्रा को बढ़ावा मिल सकता है। गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल का कहना है कि मुखबा में बर्फबारी के बावजूद समिति व्यक्तिगत प्रयासों से पूरी व्यवस्था बनाए रखती है। सरकार भी धार्मिक भावना को मध्यनजर रखकर प्रयास करे, तो योजना को धरातल पर उतारा जा सकता है।
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पर्यटन और तीर्थाटन को बढ़ावा देने पर कार्य किया जा रहा है। इसके लिए आयुष विभाग से भी सुझाव मांगे गए हैं। महाकुंभ से तीर्थयात्री पहुंचे, इसके लिए प्रस्ताव भेजेंगे। जिलास्तर पर स्टॉल लगाकर भी प्रचार-प्रसार शुरू किया जाएगा।
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मयूर दीक्षित, डीएम उत्तरकाशी।
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