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प्लांट टिशू कल्चर से संरक्षित होंगी सेब की प्रजाति

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मौसम परिवर्तन और घटती पैदावार के कारण समाप्त होती जा रही सेब की गोल्डन और रेड डिलिसियस (विल्सन) जैसी प्रजातियों के संरक्षण व संवर्धन की उम्मीद जगी है। इसके लिए उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने प्लांट टिशू कल्चर लैब तैयार की है। जिसके जरिये सेब की विलुप्त प्राय प्रजातियों के संरक्षण व संवर्धन के साथ नई व उन्नत किस्म भी तैयार की जाएगी।
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जिले में हर्षिल घाटी सहित मोरी के आराकोट, बंगाण आदि क्षेत्र सेब उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। मौसम के बदलते मिजाज के कारण यहां होने वाली करीब डेढ़ सौ साल पुरानी गोल्डन और रेड डिलिसियस प्रजाति पर काफी बुरा असर पड़ा है। सरकार अब कृषि एवं बागवानी से संबंधित प्लांट टिशू कल्चर तकनीक का इस्तेमाल सेब उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए करने जा रही है, जिसके लिए जिला मुख्यालय से करीब आठ किमी की दूर नेताला में जिला योजना से 20 लाख से अत्याधुनिक लैब तैयार की गई है। जहां शोध वैज्ञानिक रूट स्टॉक डेवलपमेंट व क्लोनिंग आदि तकनीकों के माध्यम से प्रजाति संरक्षण और नई व उन्नत किस्म तैयार करने पर काम करेंगे। लैब और नर्सरी से होते हुए उन्नत पौध बागवानों तक पहुंचेगी।
रोग मुक्त पौध तैयार करना संभव
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. रजनीश ने बताया कि प्लांट टिशू कल्चर (पादप उत्तक संवर्धन) एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसमें पौधे की एक मात्र कोशिका से पूरे पौधे का निर्माण किया जा सकता है। इस लैब का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें पौधे की सौ फीसदी शुद्ध और रोग मुक्त किस्म तैयार की जा सकती है।
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जिला योजना से प्लांट टिशू कल्चर लैब तैयार की गई है, जिसमें टिशू कल्चर से सेब के रूट स्टॉक डेवलपमेंट और नई व उन्नत किस्म विकसित की जाएगी। जिससे निश्चित तौर पर सेब उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
मयूर दीक्षित, डीएम उत्तरकाशी।
लैब में दो सीनियर रिसर्च फैलो की नियुक्ति होनी है, जिसके लिए चयन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। चयन के बाद उनकी ट्रेनिंग और सहायक स्टाफ की तैनाती के बाद लैब में काम शुरू हो जाएगा।
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डॉ. रजनीश, जिला उद्यान अधिकारी।
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