विधायक ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर छात्रहित में बदलाव करने का किया आग्रह
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के राजकीय महाविद्यालयों में सहायक प्रोफेसरों की भर्ती में पीएचडी, शोध कार्य, शिक्षण अनुभव और अन्य अकादमिक उपलब्धियों को वेटेज देने की मांग अब सरकार तक पहुंच गई है। गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर छात्रहित और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए भर्ती प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव करने का आग्रह किया है।
यह मांग शोधार्थियों और पीएचडी धारकों की ओर से विधायक को सौंपे गए ज्ञापन के बाद उठाई गई है। उनका कहना है कि सहायक प्रोफेसर भर्ती में लिखित परीक्षा के साथ पीएचडी धारक अभ्यर्थियों की अकादमिक और शोध उपलब्धियों का भी पारदर्शी तरीके से मूल्यांकन किया जाना चाहिए। शोधार्थियों ने सुझाव दिया है कि पीएचडी, नेट, शोध प्रकाशन, शिक्षण अनुभव और अन्य अकादमिक उपलब्धियों के लिए पहले से निर्धारित और पारदर्शी वेटेज तय किया जाए।
भर्ती नियम यूजीसी रेगुलेशंस-2018 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप तैयार किए जाएं। यूजीसी की निर्धारित न्यूनतम अर्हताओं को यथावत रखते हुए शोध एवं अकादमिक उपलब्धियों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जाए। शोध संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और महाविद्यालयों में अधिक योग्य शिक्षकों का चयन हो सकेगा। ज्ञापन पर डॉ. जितेंद्र ढौंडियाल, डॉ. जय हरि श्रीवास्तव, सचिन चौहान, डॉ. निधि परमार, डॉ. अंकिता डोभाल, डॉ. अंकित बिष्ट आदि मौजूद रहे।