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बनना था वैज्ञानिक, पढ़ रहे इतिहास और भूगोल

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सपना तो वैज्ञानिक बनने का था, लेकिन मजबूरी में भूगोल और इतिहास की पढ़ाई में मन लगाना पड़ रहा है। वजह सिर्फ इतनी है कि इन बच्चों के सपनों को सरकारी सिस्टम ने तवज्जो नहीं दी। इसीलिए शायद तमाम कोशिशों के बावजूद विकासखंड डुंडा के राजकीय इंटर कॉलेज फोल्ड में विज्ञान वर्ग को मंजूरी नहीं मिल पाई। पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम के नक्श-ए-कदमों पर चलने का ख्वाब इन बच्चों के लिए ख्वाब ही रह जाएगा।
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विकासखंड डुंडा के राजकीय इंटर कॉलेज फोल्ड के छात्र शिवराज ने हाईस्कूल में गणित विषय में 91 व विज्ञान में 81 अंक प्राप्त किए हैं। राजपाल ने भी गणित व विज्ञान में 81-81 अंक प्राप्त किए हैं। अखिल को भी दो विषयों में 80 से अधिक अंक प्राप्त हुए हैं। ये सभी छात्र इंटरमीडिएट स्तर पर भी विज्ञान की पढ़ाई करना चाहते थे। लेकिन मजबूरन इंटरमीडिएट में इतिहास, भूगोल और अर्थशास्त्र पढ़ना पड़ रहा है। कारण यह है कि जीआईसी फोल्ड में इंटरमीडिएट स्तर पर विज्ञान वर्ग स्वीकृत नहीं है।
ग्राम प्रधान ऐलम सिंह ने बताया कि वर्ष 2005 में फोल्ड गांव में हाईस्कूल की स्थापना हुई थी। वर्ष 2013 में हाईस्कूल को उच्चीकृत कर इंटरमीडिएट किया गया, लेकिन यहां विज्ञान वर्ग की स्वीकृति नहीं मिली। ऐलम सिंह ने बताया कि जीआईसी फोल्ड के बाद नजदीकी इंटर कालेज पिपली में है, जो करीब 6 किमी दूूर है। वहां तक जाने के लिए यातायात की भी सुविधा नहीं है। इसी वजह से बच्चों को मजबूरन कला वर्ग में ही प्रवेश लेना पड़ रहा है।
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शुक्रवार को ग्राम प्रधान ऐलम सिंह ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंप विद्यालय में 15 दिनों के भीतर विज्ञान वर्ग स्वीकृत कर शिक्षकों की तैनाती की मांग की है। ऐसा न होने पर उन्होंने उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी।
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अफसरों के अलग-अलग बोल
विकासखंड डुंडा के राजकीय इंटर कॉलेज फोल्ड में विज्ञान वर्ग के मामले के संबंध में मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद प्रसाद सेमल्टी ने बताया कि विज्ञान वर्ग की स्वीकृति शासन स्तर से होनी है। स्वीकृति मिलने पर शिक्षकों की तैनाती कर दी जाएगी। हालांकि, खंड शिक्षा अधिकारी डुंडा विक्रम जोशी का कहना है कि इस संबंध में उन्हें अभी तक कोई प्रस्ताव ही नहीं मिला है। यदि स्कूल से कोई प्रस्ताव भेजा जाता है तो उसे स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा।
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