संग्राली गांव में भंडाणी मेले में शनिवार को अनूठी आस्था के रंग देखने को मिले। यहां कंडार देवता की डोली के साथ ग्रामीणों ने रासों नृत्य कर खुशहाली की कामना की। मेला संपन्न होने पर कंडार देवता तीन दिन के विश्राम के लिए कोठार में चले गए।
संग्राली गांव में पौराणिक काल से ही भंडाणी मेला का आयोजन होता है। मेले में ग्रामीण कंडार देवता की विशेष पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना करते हैं। मेले में संग्राली, पाटा, बग्यालगांव, गंगोरी, लक्षेश्वर, खांड साल्ड, ज्ञाणज्ञा बसूंगा आदि गांवों के ग्रामीण भक्ति के रंग में रंगे दिखे।
शनिवार दोपहर बाद ग्रामीण देवता के मंदिर परिसर में एकत्र हुए। यहां देवता की डोली के साथ देर शाम तक नृत्य किया। गांव की महिलाओं की रासों नृत्य की प्रस्तुति दी। भंडाणी में पहुंची गांवों की ब्याही बेटियों ने अपनी मैती देवता को भेंट चढ़ा कर खुशहाली की कामना की।
मेले में लगे सरकारी स्टालो पर दिखी ग्रामीणों की भीड़
उत्तरकाशी। संग्राली गांव में आयोजित भंडाणी मेले में पहली बार गांव के युवक मंगल की पहल पर उद्यन, पशुपालन, कृषि, मतस्य पालन आदि विभाग ने स्टाल पर मेले में आए लोगों की खूब भीड़ दिखाई दी।
मेला स्टाल पर विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने विभाग की ओर से संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर लाभ उठाने की अपील की। इस दौरान शिवानंद आश्रम गणेशपुर के चिकित्सकों ने मेडिकल कैंप लगाकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर निशुल्क दवाइयां बांटी।
मेले में ग्रामीणों के लिए उपरीकोट के ग्रामीणों की ओर से स्थानीय उत्पाद रिंगाल से निर्मित वस्तुओं की प्रदर्शनी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। इससे पूर्व संग्राली गांव के युवा मंगल दल के सदस्यों ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत सफाई अभियान चलाकर स्वच्छता का संदेश दिया।