उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय महामंत्री व केंद्रीय कार्यालय प्रभारी जयप्रकाश उपाध्याय ने संरक्षक व जिला प्रभारी विष्णुपाल रावत को पार्टी विरोधी गतिविधि में दोषी करार देते हुए पार्टी के सभी पदों से मुक्त कर छह वर्षों के लिए उनकी प्राथमिक सदस्यता समाप्त कर दी है।
उक्रांद के केंद्रीय सचिव व जिला प्रभारी विष्णुपाल रावत ने 6 जून को पार्टी के जिला कार्यालय में सीएम तीरथ सिंह रावत को गंगोत्री विधायक गोपाल रावत के निधन से खाली हुई गंगोत्री विधानसभा से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखते हुए सभी पार्टियों से उन्हें निर्विरोध चुनाव जिताने की अपील की थी। कहा था कि सभी दल एकमत होकर सीएम को समर्थन देते हैं तो उक्रांद भी समर्थन देगा। दल के वरिष्ठ नेता की ओर से इस प्रकार का बयान मीडिया में आने के बाद प्रदेश कार्यकारिणी में खलबली मच गई। केंद्रीय महामंत्री व केंद्रीय कार्यालय प्रभारी जयप्रकाश उपाध्याय ने मंगलवार को निष्कासन पत्र जारी किया।
मैं दल में था, हूं और रहूंगा : विष्णुपाल
उक्रांद के संरक्षक व जिला प्रभारी विष्णुपाल रावत ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता कर कहा कि वह बयान उनका निजी बयान था। वर्तमान में कोरोना महामारी के साथ निवर्तमान विधायक के निधन से प्रभावित हुए अपने क्षेत्र के विकास को मध्येनजर रखते हुए उन्होंने वह बात कही थी। कहा कि जिसे सही तरीके से पढ़ने और समझने से पहले ही राजनीति शुरू हो गई। उन्होंने प्रदेश नेतृत्व की ओर से जारी पत्र पर भी सवाल खड़े किए कहा कि जब वर्तमान में केंद्रीय कार्यकारिणी भंग है, तो केंद्रीय पदाधिकारी की ओर से पत्र कैसे जारी हो सकता है। कहा, मैं दल में था, हूं और रहूंगा।
बयान पर जिलाध्यक्ष और संरक्षक में बहस
संरक्षक व जिला प्रभारी विष्णुपाल नेता के बयान से जिला कार्यकारिणी ने भी किनारा कर लिया है। जिलाध्यक्ष संतोष सेमवाल ने उनके बयान की निंदा की। कहा कि बैठक में ऐसे किसी प्रस्ताव पर चर्चा नहीं होनी थी, उस प्रस्ताव को चोरी से लाया गया। बाद में इसी बात को लेकर कार्यालय में जिलाध्यक्ष और संरक्षक आपस में ही उलझ गए, जिन्हें पार्टी पदाधिकारियों ने किसी तरह शांत कराया।