गोमुख-तपोवन ट्रैक पर ट्रैकर्स और पर्यटकों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। ट्रैकिंग एजेंसियों से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी के बीमार होने पर प्राथमिक उपचार न मिलने पर गंगोत्री पहुंचने तक खतरा बना रहता है। वहां पहुंचने के लिए करीब 18 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। उसके बावजूद मात्र स्वास्थ्य मित्रों और एसडीआरएफ के भरोसे व्यवस्था चल रही है। वह भी समय पर नहीं मिल पा रहे हैं।
गोमुख-तपोवन ट्रैक पर इस वर्ष एक हजार से अधिक पर्यटक और ट्रैकर्स उच्च हिमालयी क्षेत्रों का दीदार कर चुके हैं। करीब 12 से 14 हजार की ऊंचाई पर पहुंचने पर कई लोगों को हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के कारण वहां पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो जाती हैं। इस कारण कई लोगों की मौत भी हो जाती है। इस वर्ष कोई तो मौत नहीं हुई है। लेकिन कई पर्यटक आधे ट्रैक और पड़ावों पर बीमार हो चुके हैं। उनके प्राथमिक उपचार के लिए किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं है।
ट्रैकिंग एजेंसी से जुड़े लोगों का कहना है कि गोमुख ट्रैक के मुख्य पड़ाव चीड़बासा, भोजबासा में स्वास्थ्य मित्रों के साथ एसडीआरएफ भी तैनात है। लेकिन किसी ट्रैकर के बीमार होने पर समय पर वहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ट्रैकिंग व्यवसायी दीपक पंवार ने बताया कि बीते बृहस्पतिवार को उनके दल के गुजरात निवासी एक ट्रैकर की भोजबासा में तबीयत खराब हो गई थी। लेकिन वहां पर किसी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाई। वन विभाग के कर्मचारियों और अन्य पोटरों की मदद से उसे गंगोत्री अस्पताल पहुंचाया गया।
कहा कि अगर इस बीच में किसी प्रकार की अनहोनी हो जाती। तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। वन दरोगा राजवीर रावत ने बताया कि इससे पूर्व भी एक पर्यटक भी तबीयत खराब हुई थी। उसे भी मुश्किल से अस्पताल तक पहुंचाया गया। सीएमओ डॉ. बीएस रावत ने बताया कि गोमुख ट्रैक पर स्वास्थ्य मित्र तैनात हैं। अगर वहां पर किसी प्रकार की शिकायत है तो गंगोत्री अस्पताल प्रभारी को ट्रैक पर भेजकर व्यवस्थाओं को दुरूस्त किया जाएगा।