उत्तरकाशी। चारधाम यात्रा के दौरान यमुनोत्री और गंगोत्री धाम में आने वाले यात्रियों को सबसे अधिक ह्दय और सांस संबंधी बिमारियों से परेशान होना पड़ता है। लेकिन आज तक इसके लिए शासन की ओर से हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की गई है। हालांकि जिला अस्पताल में कार्डियो केयर यूनिट संचालित की जा रही है। लेकिन वहां पर पूरी व्यवस्थाएं न होने के कारण अधिकांश मरीजों को रेफर किया जाता है।
चारधाम यात्रा के समय यमुनोत्री धाम मेें पैदल मार्ग और वहां की भोगोलिक परिस्थिति के कारण सबसे अधिक यात्रियों की मौत होती है। इसका मुख्य कारण सांस सहित ह्दय संबंधी रोग होते हैं। हर वर्ष यात्रा से पूर्व शासन और प्रशासन की ओर से दावे किए जाते हैं कि ह्दय रोग विशेषज्ञ की तैनाती की जाएगी। लेकिन वर्षों से इस पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है। जिला अस्पताल में काडियो केयर यूनिट होने के बावजूद भी यमुनोत्री धाम से बीमार मरीजों को पहले सीएचसी बड़कोट, नौगांव रेफर किया जाता है। उसके बाद सीधा उसे देहरादून भेजा जाता है। इस सबमें धाम से बड़कोट-नौगांव तक दूरी करीब साठ और उसके बाद देहरादून की करीब 200 किमी की दूरी मरीज को तय करनी पड़ती है। इस दौरान कई बार मरीज की मौत रास्ते में हो जाती है। गंगोत्री धाम की बात करें तो वहां से जिला अस्पताल की दूरी 100 किमी है। वहां पर अधिकांश मरीजों को देहरादून या ऋषिकेश रेफर किया जाता है। यह दूरी करीब दो से 250 किमी की होती है। सीएमओ डॉ. बीएस रावत का कहना है कि जिला अस्पताल में डिप कार्डियोलॉजिस्ट तैनात है। साथ ही धामों में फिजिशियन तैनात है। ह्दय रोग विशेषज्ञों की कमी पूरे प्रदेश में बनी हुई है।