किसानों को बारिश का डर, कटी फसल भीगने से बचाने की चिंता
पुरोला। रवांई घाटी में लाल धान की कटाई के बीच इस बार किसानों की सबसे बड़ी चिंता फसल को समय पर समेटने की है। मौसम के बदलते मिजाज ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारिश हुई तो खेतों में कटी फसल भीगने और दानों की गुणवत्ता खराब होने का खतरा है। ऐसे में किसान मौसम साफ रहने के बीच जल्द से जल्द फसल समेटने में जुटे हैं।
पुरोला, मोरी और नौगांव विकासखंड के गांवों में किसान सुबह से शाम तक खेतों में काम कर रहे हैं। परिवार के सभी सदस्य कटाई में हाथ बंटा रहे हैं। कहीं धान के पूले खेतों में सुखाए जा रहे हैं तो कहीं फसल को खलिहानों तक पहुंचाया जा रहा है। किसानों के सामने चुनौती केवल कटाई पूरी करने की नहीं बल्कि तैयार उपज को बारिश से बचाकर उसकी गुणवत्ता बनाए रखने की भी है।
किसान कैलाश उनियाल, हकूमत सिंह, नवीन गैरोला, ओमप्रकाश गैरोला और सुदामा प्रसाद बताते हैं कि इस साल फसल के दौरान कभी अधिक बारिश तो कभी लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति रही। अब कटाई के समय बारिश की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि धान भीगने से गुणवत्ता प्रभावित हुई तो बाजार में उचित दाम मिलने की उम्मीद को झटका लग सकता है।
रवांई घाटी का पारंपरिक लाल धान अपने स्वाद और पौष्टिकता के लिए जाना जाता है। कृषि विशेषज्ञ विकेश तोमर ने किसानों को मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखने, कटी फसल को सुरक्षित स्थान पर रखने और भंडारण से पहले धान को अच्छी तरह सुखाने की सलाह दी है। फिलहाल किसानों की कोशिश है कि मौसम बिगड़ने से पहले फसल सुरक्षित हो जाए।