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बच्चों का स्कूल पहुंचना हुआ मुश्किल

Tue, 23 Aug 2016 09:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
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भूस्खलन - फोटो : file photo
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सड़क नहीं अब गांव की पगडंडियां भी भूस्खलन की चपेट में आने से बच्चों का स्कूल पहुंचना मुश्किल हो रहा है। तीन से छह किमी पैदल रास्ते पर भूस्खलन से पत्थरों की बौछार और कहीं गदेरा पार करने के अस्थाई इंतजाम के कारण सांगल, तिहार, कुज्जन, सिल्ला गांव के कुछ ही अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने की हिम्मत जुटा पा रहे है। शिक्षा विभाग जिले में बरसात के दौरान 15 फीसदी कम उपस्थिति का दावा तो कर रहे है, किंतु भटवाड़ी क्षेत्र में अनुपस्थिति का आंकड़ा ज्यादा बताया जा रहा है।
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सांलग गांव से भटवाड़ी तक बालक और बालिका इंटर कालेज छह किमी पैदल दूरी पर है। रास्ते कई जगह भूस्खलन से पटे है। इस गांव से 50 से ज्यादा बच्चे रोजाना भटवाड़ी पढ़ने आते है। रास्ते में 2013 में गदेरे पर बही पुलिया के बदले कुछ बल्ली और तख्ते डालकर गुजरना खतरे से खाली नहीं है। हुर्री गांव से बच्चे पैदल ही किसी प्रकार स्कूल तक पहुंच रहे हैं।

गर्मकुंड, गंगनाणी व भूस्खलन जोन में पत्थर गिरने से आए दिन बच्चे चोटिल हो रहे है। यही स्थिति भुक्की, सुनगर, कुंज्जन तथा तिहार से संगलाई हाईस्कूल में गांव से आने वाले बच्चों की है।
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सांलग के प्रधान बछेंद्र सिंह, कुज्जन की सीता देवी, रघुवीर सिंह, हुर्री की राखी, सिल्ला के सूरत सिंह राणा, विजय सिंह आदि का कहना है कि उन्होंने श्रमदान कर कही टूटे रास्तों पर तख्ते डालकर तो कहीं मलबा साफ कर रास्ता तो बनाया किंतु बरसात में बच्चों को जान हथेली पर रख कर यहां से गुजरना पड़ता है। कई लोग अपने बच्चों को इस स्थिति में स्कूल नहीं भेज पा रहे है।

गांव के पैदल रास्तों को ठीक करने के प्रस्ताव आ गए है। इन्हें जांच के बाद प्राथमिकता वार संबंधित विभागों को भेजा जा रहा है।
देवेंद्र पटवाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी।

जिले के विद्यालयों में बरसात के कारण छात्रों की करीब 15 फीसदी अनुपस्थिति दर्ज की गई। भटवाड़ी क्षेत्र के कुछ गांवों में वहां की स्थिति देखकर अनुपस्थिति कुछ ज्यादा हो सकती है।
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लीलाधर व्यास, मुख्य शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी।
 
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