नगर पालिका और जिला प्रशासन के उपेक्षित रवैये के चलते नगर का रामलीला मैदान अपना स्वरूप खोता जा रहा है। कभी खेल, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहे इस मैदान को अब पार्किंग, कचरा डंपिंग जोन एवं सब्जी मंडी के तौर पर किया जा रहा है इस्तेमाल। इस मैदान को मिनी स्टेडियम के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में पड़ा है।
जिला मुख्यालय पर नगर के मध्य स्थित रामलीला मैदान का स्वर्णिम इतिहास रहा है। हर साल पौराणिक माघ मेला एवं रामलीला आयोजन के साथ ही यह मैदान कभी खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा। इस मैदान में क्रिकेट, फुटबाल समेत तमाम खेलों की राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं आयोजित हुई हैं।
इंदिरा गांधी, लालकृष्ण आडवाणी, सोनिया गांधी समेत तमाम बड़े नेताओं की चुनावी सभाएं इसी मैदान में हुईं। अतिक्रमण की मार झेल रहे इस मैदान को दुरुस्त करने और इसके सौंदर्यीकरण के नाम पर बीते सालों में एक करोड़ से अधिक बजट खर्च किया जा चुका है। वर्तमान राज्य सरकार ने इसे मिनी स्टेडियम के तौर पर विकसित करने की घोषणा भी है।
आज स्थिति यह है कि जिला मुख्यालय पर स्थाई बस अड्डा न होने के कारण इस मैदान को पार्किंग के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। मामूली तहबाजारी के लालच में पालिका ने इस मैदान को ठेली एवं फड़ व्यापारियों का अड्डा बना दिया है।
हद तो ये है कि नगर के कचरा डंपिंग जोन के लिए जगह तलाशने में नाकाम पालिका और प्रशासन ने इस मैदान में ही कूड़े के ढेर लगाने शुरू कर दिए हैं। मैदान के किनारे बनी नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं। पेयजल के लिए मैदान में ट्यूबवैल की बोरिंग कराई जा रही है। यही हाल रहे तो कुछ ही सालों में यह मैदान किसी सार्वजनिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं खेल गतिविधि के लायक नहीं रह जाएगा।
देखी नहीं जाती मैदान की यह दुर्दशा
वरिष्ठ खिलाड़ी हकीमुद्दीन खान, दिनेश गौड़, मनोज चौहान, प्रह्लाद बुटोला, अनकपाल बष्ट आदि का कहना है कि रामलीला मैदान को खेल गतिविधियों के लिए संरक्षित करना जरूरी है। मैदान की यह दुर्दशा देखी नहीं जाती। मैदान बचा रहेगा तभी खेल प्रतिभाओं को आगे आने का मौका मिलेगा। सुबह के समय लोग इस मैदान में योग, आसन और मॉर्निंग वाक भी कर सकते हैं।
कोट........
बस अड्डा न होने पर यात्रा सीजन में प्रशासन के दबाब में आजाद मैदान को पार्किंग के लिए खोलना पड़ता है। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर यहां उड़ेले गए कूड़े को शीघ्र हटाया जा रहा है। मैदान को दुरुस्त कराने के लिए करीब तीस लाख का बजट स्वीकृत हुआ है। इससे मैदान के किनारे नाली एवं गेटों का निर्माण कराकर इसे सुरक्षित किया जाएगा।