शुक्रवार शाम को बारिश की हल्की बौछारों से कुछ देर के लिए थमी जंगलों की आग शनिवार को फिर भड़क गई है। जिले में जगह-जगह सुलग रहे जंगलों से उठता धुआं वातावरण में जहर घोल रहा है। दावानल का रुख आबादी की ओर होने से नुकसान का दायरा बढ़ता जा रहा है।
शनिवार को डुंडा एवं मुखेम रेंज के साथ ही वरुणावत पहाड़ी पर लगी आग ने विकराल रूप ले लिया। वरुणावत पहाड़ी पर लगी आग तो ज्ञानसू आबाद बस्ती तक पहुंच गई है। शाम के समय दावानल का रुख ज्ञानसू गैस गोदाम की ओर होने से बड़ी तबाही का खतरा पैदा हो गया है।
मौके पर पहुंचे पुलिस एवं दमकल के जवान आग पर काबू पाने की कवायद में जुटे हैं। उधर, गाजणा क्षेत्र में भड़कोट बागी बीट के जंगलों में लगी आग विकराल होने पर वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से आग पर काबू पाया।
भड़कोट गांव की वन पंचायत सरपंच सोनदेई रावत, नैन सिंह, बलवीर सिंह, विजय बिष्ट, अरुण, अनीता देवी, रुकमणी, वन दरोगा राजेंद्र सिंह, लक्ष्मण सिंह, खुशाल सिंह, गोविंद सिंह आदि ने भारी मशक्कत कर आग पर काबू पाया।
दूरसंचार सेवा भी चढ़ी दावानल की भेंट
उत्तरकाशी। जंगलों की आग दूरसंचार सेवाओं पर भी भारी पड़ रही है। मानकों को ताक पर रख जंगलों में पेड़ों पर बिछाई गई ओएफसी केबल दावानल की भेंट चढ़ रही है। इसके चलते रवाईं घाटी में बीएसएनएल की संचार सेवाएं तीन दिनों से ठप पड़ी हैं।
जिला मुख्यालय क्षेत्र की दूरसंचार सेवा भी शुक्रवार शाम से ठप है। हालांकि शनिवार देर शाम को बीएसएनएल की मोबाइल फोन सेवा चालू हो गई। बीएसएनएल के एसडीई विशाल वर्मा ने स्वीकारा कि जंगलों में लगी आग से ओएफसी केबल जलने के कारण दूरसंचार सेवा प्रभावित हो रही है। उत्तरकाशी से आगे के क्षेत्र में सेटेलाइट माध्यम से दूरसंचार सेवा चालू है।