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फिर उठने लगी नए जिलों के निर्माण की मांग

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वर्ष 2011 में घोषित चार जनपदों को अस्तित्व में लाने की मांग एक बार फिर उठने लगी है। घोषित जनपदों को जल्द अस्तित्व में न लाए जाने पर संयुक्त (घोषित) जनपद संघर्ष समिति ने 15 अगस्त से आंदोलन की चेेतावनी दी है। इस संबंध में समिति ने यमुनाघाटी दौरे पर आए जनपद के प्रभारी मंत्री गणेश जोशी को ज्ञापन भी सौंपा है।
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वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने स्वतंत्रता दिवस पर चार नए जनपदों के गठन की घोषणा की थी। इसके लिए राज्य के जनपदों का आकार कम किया गया था। इन नए जनपदों में यमुनोत्री, कोटद्वार, रानीखेत व डीडीहाट को शामिल किया गया था, लेकिन घोषणा के 10 साल बाद भी उक्त चारों जनपद अस्तित्व में नहीं आ पाए हैं। संयुक्त (घोषित) जनपद संघर्ष समिति के अध्यक्ष अब्बल चंद कुमाई ने बताया कि जनपदों के गठन की अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। बावजूद इसके जनपदों को अस्तित्व में नहीं लाया जा रहा है। अब्बल सिंह कुमाईं ने कहा कि सरकारें कभी इन जनपदों को अस्तित्व में लाने के लिए गंभीर नहीं रही। समिति ने केंद्रीय गृहमंत्री, राज्यपाल, उत्तराखंड की विभिन्न सरकारों के मुख्यमंत्रियों, भाजपा प्रदेश अध्यक्षों से वार्ता की, लेकिन हर समय आश्वासन ही मिला। समिति के अध्यक्ष ने कहा कि अब समिति सरकारों के आश्वासन से हताश व निराश हो चुकी है। अब एक बार फिर आंदोलन का निर्णय लिया गया है।
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