यमुना व गंगा के शीतकाल पड़ाव खरसाली व मुखबा में शीतकालीन यात्रा महज नाम मात्र की चल रही है। यमुनोत्री व गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद खरसाली व मुखबा में शीतकालीन यात्रा के नाम पर अभी तक सौ यात्री भी नहीं पहुंचे हैं। तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि प्रचार प्रसार के अभाव में शीतकालीन यात्रा दम तोड़ रही।
30 अक्टूबर को गंगोत्री व 1 नवंबर को यमुनोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए है। कपाट बंद होने के साथ हंी मां यमुना व गंगा के मायके खरसाली व मुखबा में शीतकालीन यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो गई है, लेकिन एक माह के भीतर ही शीतकालीन यात्रा फ्लाप साबित हुई है।
अब तक सौ यात्री भी खरसाली व मुखबा मां के दर्शन को नहीं पहुंच पाए। सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए शीतकालीन यात्रा की असफलता को नोटबंदी से जोड़ रही है। बीते दिनों कांग्रेस की सतत विकास संकल्प यात्रा के दौरान उत्तरकाशी आए प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा था कि नोटबंदी का असर शीतकालीन यात्रा पर पड़ा है।
शीतकालीन यात्रा को शुरू हुए तीन साल हो गए लेकिन यात्रियों की संख्या फिर भी नहीं बढ़ी। पिछले तीन सालों में दोनों धाम में दो हजार से अधिक यात्री भी नहीं पहुंचे। तीर्थ पुरोहितों की मानें तो सरकार ने शीतकालीन यात्रा की औपचारिक घोषणा तो की लेकिन प्रचार प्रसार व सुविधाओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया, जिसके चलते शीतकालीन यात्रा उम्मीदों के अनुरूप नहीं चल पा रही है।
मुखबा मंदिर के तीर्थ पुरोहित सुधांशु सेमवाल का कहना है कि शीतकालीन यात्रा ठीक नहीं चल रही। सरकार यदि यात्रा के प्रचार प्रसार पर ध्यान दे तो यात्रियों की संख्या में इजाफा हो सकता है।