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साल्ड का आयुर्वेदिक अस्पताल जर्जर

Mon, 30 Nov 2015 05:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उत्तरकाशी
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वरुणा घाटी क्षेत्र के 12 गांवों में चिकित्सा सेवाओं के लिए वर्ष 1987 में साल्ड गांव में आयुर्वेदिक अस्पताल खोला गया था। अस्पताल के मुख्य भवन के साथ ही यहां डाक्टर, फार्मेसिस्ट और अन्य कर्मचारियों के लिए आवासीय भवन भी बनाए गए। देखरेख के अभाव में भवन जर्जर हो गया है।
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डाक्टर बरामदे में बैठकर ही मरीजों को देख रहे हैं। अस्पताल के आवासीय भवन भी जर्जर हो चुके हैं। वर्षों से अस्पताल का बिजली-पानी का कनेक्शन भी कट गया है।


गांव के मंशाराम नौटियाल, जिला पंचायत सदस्य सरिता राणा आदि ने बताया कि क्षेत्र के एक दर्जन गांवों के मरीज चिकित्सा सेवाओं के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में रहने के बावजूद अस्पताल भवन को दुरुस्त नहीं कराया गया। उन्होंने शीघ्र अस्पताल भवन को दुरुस्त कराने की मांग की है।
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अन्य सरकारी भवन भी बने हैं जर्जर
अटल आदर्श ग्राम साल्ड में आयुर्वेदिक अस्पताल भवन के साथ अन्य सरकारी भवन भी बदहाल पड़े हैं। बंद पड़े पशु सेवा केंद्र तथा मातृ शिशु रक्षा केंद्र के भवनों में वर्षों से नेपाली परिवार कब्जा किए हैं। पटवारी चौकी, कृषि निवेश केंद्र, आंगनबाड़ी, साधन सहकारी समिति के मिनी बैंक पर अक्सर ताले ही लटके रहते हैं।


अस्पताल भवन बेहद जर्जर होने से मरीजों को यहां भर्ती करने की स्थिति नहीं है। फिलहाल मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें जरूरी दवाएं और प्राथमिक उपचार देने की व्यवस्था ही है।- डा. रतनमणी भट्ट, चिकित्साधिकारी आयुर्वेदिक अस्पताल साल्ड।

मैंने दो बार अस्पताल का निरीक्षण किया है। स्थिति वास्तव में बड़ी खराब है। लोनिवि से भवन का निरीक्षण कर इसकी रिपोर्ट मांगी गई है।- डा. डीडी बधानी, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी।
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