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‘प्रकृति से छेड़छाड़ आपदाओं का कारण’

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चमोली जनपद में आई आपदा ने एक बार फिर हिमालय क्षेत्र में जल विद्युत परियोजनाओं समेत अन्य बड़ी परियोजनाओं पर बहस का मुद्दा दे दिया है। पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में जुटे लोग प्रकृति के साथ छेड़छाड़ को आपदाओं का मूल कारण बता रहे हैं, जबकि विकास के पैरोकार प्रकृति को संरक्षित रखते हुए विकास योजनाओं की पैरवी कर रहे हैं।
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ग्लेशियर लेडी शांति ठाकुर का कहना है कि हिमालय क्षेत्र में भारी भरकम बिजली परियोजनाएं बनाने के लिए प्रकृति के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। सुरंगें खोदे जाने से पहाड़ियां खोखली होती जा रही हैं।
माधवेंद्र रावत, प्रदीप रावत का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण जरूरी है। साथ ही विकास कार्य भी होने चाहिए। जल विद्युत परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने के साथ ही क्षेत्र का विकास होता है। ऑल वेदर रोड के निर्माण से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही सीमाओं की सुरक्षा मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि प्रकृति को सुरक्षित रखते हुए विकास कार्य कराए जाने जरूरी हैं।
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