उद्गम से ही संकट में यमुना नदी, यात्रियों की बढ़ती भीड़, कचरा प्रबंधन व्यवस्था कमजोर
बड़कोट। यमुना नदी की स्वच्छता और निर्मलता को लेकर समय-समय पर बड़े दावे किए जाते हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर है। यमुनोत्री धाम यात्रा मार्ग पर मां यमुना के उद्गम क्षेत्र से लेकर जानकीचट्टी तक कई स्थानों पर कूड़ा बिखरा है जो नदी और पर्यावरण दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर डामटा से जानकीचट्टी तक लगभग 85 किलोमीटर के क्षेत्र में कई कस्बों और पड़ावों पर ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। कई जगहों पर सड़क किनारे कूड़े के ढेर लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश और ढलानों के कारण यह कचरा यमुना नदी तक पहुंच जाता है जिससे नदी की स्वच्छता प्रभावित हो रही है।
कूड़ेदानों में एकत्रित कचरे को वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करने के बजाय उसे जलाया जा रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी प्रवृत्ति न केवल प्रदूषण बढ़ाती है बल्कि वनाग्नि जैसी घटनाओं का कारण भी बन सकती है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यमुना स्वच्छता को लेकर समय-समय पर अभियान तो चलाए जाते हैं लेकिन उनका प्रभाव स्थायी रूप से दिखाई नहीं देता।
उनका कहना है कि अधिकांश गतिविधियां जागरूकता कार्यक्रमों और प्रतीकात्मक अभियानों तक सीमित रह जाती है जबकि कूड़ा निस्तारण की मूल समस्या जस की तस बनी है। यात्रा मार्ग पर बढ़ती आवाजाही के अनुपात में सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधाओं का पर्याप्त विस्तार नहीं हो पाया है। कई स्थानों पर शौचालयों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले अपशिष्ट के उचित प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।