12 नवंबर से सुरंग के भीतर फंसे 41 मजदूरों ने बुधवार को ब्रश किया और कपड़े भी बदले। मजदूरों के लिए जरूरी खाद्य सामग्री के साथ ही कपड़े और दवाइयां भी भेजी गई। एनएचआईडीसीएल के एमडी महमूद अहमद ने बताया कि चार और छह इंच के लाइफ पाइप से लगातार मजदूरों को खाद्य सामग्री भेजी जा रही है। उन्होंने बताया कि बुधवार को उन्हें रोटी, सब्जी, खिचड़ी, दलिया, संतरे और केले भेजे गए।
वहीं उन्हें टीशर्ट, अंडर गारमेंट, टूथपेस्ट और ब्रश के साथ ही साबुन भी भेजा गया। मजदूरों ने कपड़े बदले, मुंह हाथ धोया और भोजन किया है। उन्होंने बताया कि टेलीस्कोपिक कैमरे की मदद से सभी मजदूरों को देखा गया है।
आर्नोल्ड डिक्स ने की रेस्क्यू ऑपरेशन की सराहना...इंटरनेशनल टनलिंग एंड अंडरग्राउंड स्पेस एसोसिएशन (आईटीए) के अध्यक्ष प्रो.आर्नोल्ड डिक्स ने सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को बचाने के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन की सराहना की है। उन्होंने कहा कि सुरंग से जुड़े हादसों में जब वह बचाव के लिए पहुंचते हैं तो ज्यादातर में अंदर फंसे लोगों की मौत हो चुकी होती है। जबकि यहां वह जिंदा है और उन्हें बहार निकालने के लिए रात-दिन प्रयास किए जा रहे हैं। आईटीए के अध्यक्ष प्रो. आर्नोल्ड डिक्स ने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन में अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए विभिन्न विकल्पों पर एक साथ काम किया जा रहा है। प्रत्येक विकल्प में खतरे को भांप कर काम किया जा रहा है। संवाद
सृष्टि रचयिता ब्रह्मा की भूमि में सभी सुरक्षित
सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा की भूमि ब्रह्मखाल के (सिलक्यारा) क्षेत्र की सुरंग से आखिर मजदूरों के सुरक्षित होने पर उत्तराखंड ने इतिहास रच दिया। संभवत: अब बृहस्पतिवार को इगास का जश्न मनाएंगे। ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान ब्रह्मा ने तपस्या की थी। राजस्थान के पुष्कर की भांति यहां भी ब्रह्मखाल में भगवान ब्रह्मा का मंदिर है, जिसमें उनकी पूजा-अर्चना होती है। पूरे ऑपरेशन सिलक्यारा के दौरान तकनीकी के इस्तेमाल के साथ आस्था का बेजोड़ संगम देखने को मिला। हर दिन अभियान की शुरुआत से पहले सुरंग के बाहर बाबा बोखनाग की पूजा होती थी। भंडारस्यूं पट्टी के सिलक्यारा से कुछ मील पहले कस्बा ब्रह्मखाल है। इस स्थान का अपना अलग महत्व बताया जाता है।
स्थानीय निवासी विरेंद्र अवस्थी ने बताया कि यह मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने इस स्थान पर तपस्या की थी और ब्राह्मण रूप धारण किया था। राजस्थान के पुष्कर की भांति यहां उनका बहुत प्राचीन मंदिर है। राजस्थान से आए हुए रावत इस मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं। वह कहते हैं, दिवाली के दिन भले ही मुश्किलों भरी खबर आई हो लेकिन अन्य देवताओं की तुलना में काफी उदार कहे जाने वाले भगवान ब्रह्मा की इस भूमि ने आखिर मजदूरों की जिंदगी के लिए राह आसान कर दी। ऑस्ट्रेलिया से आए इंटरनेशनल टनल एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. अर्नोल्ड डिक्स की भी सुरंग में प्रवेश से पहले पूजा करते हुए तस्वीर काफी वायरल हुई।
हौसला बढ़ाने में कोविड फाॅर्मूला काम आया
सुरंग में फंसे 41 मजदूरों का हौसला बढ़ाने में कोविड का फाॅर्मूला भी काम आया। जिला अस्पताल में तैनात वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. प्रेम पोखरियाल ने बताया कि कोरोनाकाल में कोरोना से संक्रमित मरीजों को यह कहा जा रहा था कि ईश्वर आपके साथ है। सब आपकी मदद कर रहे हैं। आप जल्दी बाहर निकलोगे। यहां भी इन्हीं शब्दों ने मजदूरों का हौसला बढ़ाया। डॉ. पोखरियाल उन चिकित्सकों में शामिल हैं जिन्हें सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों के स्वास्थ्य पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने बताया कि कोरोना मरीजों को खुद पर भरोसा रखने के साथ यह कहते थे कि आप विजयरत्न हो, ईश्वर आपके साथ है। सब आपकी मदद कर रहे हैं। आप जल्द बाहर निकलोगे। यहां भी उन्होंने जब अंदर फंसे मजदूरों से बात की तो मजदूरों से ईश्वर पर भरोसा रखने को कहा।