पटारा गांव में पेयजल संकट गहराने से लोग बरसात में भी पीने के पानी को तरस रहे हैं। स्थिति यह है कि ग्रामीणों को तीन-चार किमी दूर से खच्चरों पर पानी ढोना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने डीएम से मुलाकात कर गांव में स्वीकृत ग्योनोटी-पटारा पेयजल योजना को स्वीकृति प्रदान कर समस्या के निराकरण की मांग की।
केंद्र सरकार की ओर से जल क्रांति के तहत जल ग्राम घोषित हुए पटारा गांव के ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। गांव में पानी का प्रकृतिक स्रोत नहीं होने से बरसाती पानी एकत्र कर पीने को मजबूर हैं, लेकिन बारिश नहीं होने पर ग्रामीणों को गांव से करीब चार किमी दूर से घोड़े- खच्चरों से पानी ढुलान पड़ रहा है।
मंगलवार को प्रधान प्रमोद लाल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने डीएम दीपेंद्र चौधरी से मुलाकात कर गांव की पेयजल समस्या के बारे बताया। उन्होंने कहा कि गांव में पेयजल किल्लत होने से ग्रामीण बरसात का दूषित पानी पीने को मजबूर है। बताया कि पूर्व में जल संस्थान की ओर से गांव में टैंकर से जो पेयजल आपूर्ति की जा रही थी, वह भी बंद हो गई है।
उन्होंने ग्रामीणों को पेयजल समस्या से निजात दिलाने के लिए ग्योनोटी-पटार पेयजल योजना पर शीघ्र काम शुरू कराने की मांग की है। इस संबंध में जल निगम के एसपी गुप्ता ने बताया कि भारत सरकार के सर्वे में पटारा गांव जल ग्राम घोषित किया गया है। बरसात सीजन निपटने के बाद गांव में पटारा ग्यूनोटी पेयजल योजना इस्टीमेट तैयार किया जाएगा।