आपदा में हाईवे सहित तमाम सड़कों की बदहाली और खतरे की जद में आई आबादी को सुरक्षित करने की दिशा में कोई पहल न होने पर बृहस्पतिवार को जनता का गुस्सा फूट पड़ा।
जनसंगठनों के साझा मंच के आह्वान पर आम लोगों ने न सिर्फ बंद और चक्का जाम को व्यापक समर्थन दिया बल्कि कलक्ट्रेट पर हल्ला बोल कर अपने मंसूबे भी जाहिर कर दिए।
बस रोटेशन यातायात एवं सभी टैक्सी यूनियनों के आंदोलन में शामिल होने से यहां वाहनों के पहिए पूरी तरह जाम रहे। आंदोलनकारियों ने पल्ला ज्ञानसू, गैस गोदाम, उजेली और इंद्रावती पुल के पास जाम लगाकर अन्य वाहन भी नहीं चलने दिए।
नोक-झोंक हुई
इस दौरान गैस गोदाम पर पुलिस वाहन रोके जाने पर दोनों पक्षों में नोक-झोंक हुई। शेष स्थानों पर लोगों ने स्वयं ही बंद का समर्थन करते हुए वाहन खड़े रखे। टैक्सियां न चलने से कई शिक्षक स्कूल नहीं पहुंच पाए।
साझा मंच के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया।
यहां भी भारी शोरशराबे के बीच दफ्तर बंद कराए गए। आखिरकार जिलाधिकारी डा. पंकज पांडेय ने जनता के बीच आकर उनकी मांगें सुनीं और इस पर मौखिक तथा तीन घंटे तक अधिकारियों के साथ माथापच्ची करने के बाद लिखित जवाब भी दिए।
जवाब संतोषजनक नहीं बताते हुए साझा मंच ने कलक्ट्रेट में चला आ रहा धरना जारी रखने और आंदोलन तेज करने का ऐलान किया।
चाय को भी तरसे लोग
जिला मुख्यालय, तिलोथ, जोशियाड़ा, ज्ञानसू समेत भटवाड़ी आदि इलाकों में बंद का व्यापक असर रहा। बड़ी दुकानों से लेकर ठेली खोमचे तक बंद रहने से लोगों को चाय तक नसीब नहीं हुई।
प्रशासन की ओर से नोटिस जारी होने के बावजूद स्कूल बंद रहे। बैंक एवं अधिकांश कार्यालय भी नहीं खुले। बंद पूरी तरह स्वत: स्फूर्त रहा।
इन संगठनों की रही भागीदारी
व्यापार मंडल, बस रोटेशन यातायात, होटल एसोसिएशन, टैक्सी यूनियन, ट्रक एसोसिएशन, नागरिक मंच, लोक सेवक संघ, मिनी व्यापार मंडल, संवेदना समूह, कला दर्पण, बार एसोसिएशन, गायत्री परिवार, भूतपूर्व सैनिक संगठन, कुटेटी कला मंच, जोशियाड़ा, गंगोरी, तिलोथ, उत्तरकाशी बाढ़ पीड़ित संघर्ष समिति, आपदा प्रबंधन जनमंच, आर्यन ग्रुप, अभाविप, एनएसयूआई, ओम ग्रुप, शक्ति ग्रुप आदि।