नौगांव प्रखंड के थली गांव में कुछ इस तरह जोखिम के साथ नदी पार करने को मजबूर हैं ग्रामीण।
- फोटो : Amar Ujala
बरसात में कमल नदी में पानी बढ़ने से एक बार फिर थली गांव के ग्रामीणों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। पुल के अभाव में ग्रामीण दो बल्लियों के सहारे जान जोखिम डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। सामान के साथ आवाजाही के लिए उन्हें सात किमी का चक्कर काटना पड़ रहा है।
थली गांव के 65 परिवारों की खेतीबाड़ी की जमीन साड़ा तोक में होने के कारण ग्रामीण साल के आठ महीने यहीं निवास करते हैं। ब्लाक मुख्यालय तक आवाजाही के लिए कमल नदी पार करनी पड़ती है, लेकिन पुल नहीं होने से ग्रामीणों को सात किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
सर्दियों के चार माह तो कमल नदी में पानी कम होने पर ग्रामीण आसानी से नदी में उतरकर आवाजाही कर लेते हैं, लेकिन गर्मी एवं बरसात के आठ महीने नदी में पानी ज्यादा होने पर यह रास्ता बंद हो जाता है। हालांकि ग्रामीणों ने यहां बड़े पत्थरों के ऊपर दो बल्लियां डालकर आवाजाही की व्यवस्था की है, लेकिन यह जोखिमभरा है।
थली गांव की प्रधान सुशीला देवी, जयवीर सिंह, भोपाल राणा आदि का कहना है कि यदि साड़ा तोक में कमल नदी पर पुल बन जाए, तो ग्रामीणों को सड़क तक पहुंचने के लिए महज आधा किमी दूरी तय करनी पड़ेगी। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार पुल निर्माण की मांग कर चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी है।