नहरों की मरम्मत न होने के कारण काश्तकारों के सामने रोपाई की समस्या पैदा हो गई है। मोरी ब्लाक के गडूगाड़ पट्टी के बिंगसारी नहर की गत दो वर्ष से मरम्मत न होने के कारण यहां करीब आधा दर्जन गांव के लोग स्रोतों से पीठ पर पानी ढोकर धान की नर्सरी की सिंचाई करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने शीघ्र नहर की मरम्मत न करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
मोरी ब्लाक के गडूगाड पट्टी के लिए बनी नौ किमी लंबी सिंचाई नहर गत दो वर्ष पूर्व बेवाणाई तोक में करीब 500 मीटर भूस्खलन के कारण धंस गई थी, जिससे यहां कुमणाई, बिंगसारी, रमाल गांव, डोभाल गांव, रास्ती, तिया, खुरमोड़ आदि गांव के लोगों को धान की नर्सरी तैयार करने सहित रोपाई की समस्या बनी हुई है। ग्रामीण यहां पीठ पर पानी ढोकर धान की नर्सरी की सिंचाई कर रहे हैं। गडूगाड विकास समिति के अध्यक्ष जयराम चौहान ने बताया कि रोपाई के लिए ग्रामीण बरसाती पानी पर ही निर्भर हैं। बारिश अगर अच्छी हो गई, तो रोपाई हो जाती है नहीं तो अधिकांश खेत बिना रोपाई के ही रह जाते हैं। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि कई बार विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में अवगत करा चुके हैं। उन्होंने शीघ्र नहर की मरम्मत न करने पर ग्रामीणों के साथ सिंचाई विभाग कार्यालय में धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी। इधर, बिजेडी नहर की भी मरम्मत भी न होने से काश्तकार परेशान हैं। क्षेत्र के मोहन सिंह नेगी ने बताया कि नगर सिंचाई विभाग के कार्यालय के ठीक नीचे है, बावजूद इसकी मरम्मत नहीं हो पाई है।
नहरों की मरम्मत के लिए इस्टीमेट शासन को भेज गया है। बजट न होने के कारण नहर की मरम्मत में दिक्कत हो रही है। रोपाई के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा।
सचिन सिंघल, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग।