भूधंसाव प्रभावित बागी गांव के 129 परिवारों को सरकार ने चरगढ़ी तोक में पुनर्वासित तो कर दिया, लेकिन 34 परिवारों के मकान का कुछ हिस्सा सरकारी जमीन पर होने पर प्रशासन ने उनकी 1.40 लाख की आखिरी किश्त देने से इंकार कर दिया। इतना ही नहीं विस्थापितों को 18 साल का सरकारी जमीन के किराए का नोटिस भी थमा दिया है। इससे क्षुब्ध 15 परिवारों ने गांव छोड़ दिया है।
पहले बाढ़ और 1997-98 में भूधंसाव से आधा से ज्यादा बागी गांव धंस गया था। आंदोलन के बाद वर्ष 2008 में सरकार ने केंद्र पोषित वरुणावत पैकेज में गांव के 129 परिवारों को 3.60 लाख की मदद का एलान कर चरगढ़ी तोक में इनके मकान बनवाने शुरू किए।
34 लोगों के मकान का कुछ हिस्सा सरकारी जमीन में होने पर प्रशासन ने 1.40 लाख की आखिरी किश्त पर ब्रेक लगा दी। इससे क्षुब्ध गंगा प्रसाद, जयप्रकाश, सुरेंद्र प्रसाद, कृष्णानंद भट्ट, कृष्णा प्रसाद, रामलाल आदि 15 परिवार चंडीगढ़, पंजाब चले गए।
गांव के द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने विस्थापितों की समस्या के निराकरण के लिए शासन से गुहार लगाई, तो प्रशासन की ओर से उसे गलत बयानबाजी करने पर कानूनी कार्रवाई का नोटिस दिया गया।
प्रशासनिक अधिकारी विशन सिंह राणा कहते हैं कि सरकारी जमीन पर हमने 34 परिवारों का चालान किया है। इसी आधार पर अंतिम किश्त रोकी गई है। अब शासन को प्रस्ताव भेजकर आपदा प्रभावितों को सरकार की नई नीति के अनुसार 180 वर्ग मीटर जमीन नियमित करने का अनुरोध किया गया है।