नेहरू पर्वतारोहण संस्थान आज पचास साल का हो गया। निम प्रशासन ने आगामी पूरे साल को गोल्डन जुबली वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, जिसका शुभारंभ 14 नवंबर शनिवार को किया जाएगा। तभी आगामी कार्यक्रम घोषित किए जाएंगे।
वर्ष 1965 में उत्तरकाशी में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की स्थापना की गई थी। आजकल केदारनाथ पुनर्निर्माण एवं यात्रा के सफल संचालन के लिए सुर्खियों में चल रहे निम ने इन पचास सालों में उपलब्धियों का पहाड़ खड़ा किया है।
इन पचास सालों में निम में चलाए जा रहे एडवेंचर, बेसिक, एडवांस, सर्च एंड रेस्क्यू, मैथड ऑफ इंस्ट्रक्शन तथा स्पेशल कोर्स से 27 हजार से अधिक प्रशिक्षु पर्वतारोहण, स्कीइंग, राफ्टिंग आदि साहसिक गतिविधियों के गुर सीख चुके हैं। इसमें विश्व के विभिन्न देशों के करीब पांच हजार से ज्यादा प्रशिक्षु भी शामिल हैं।
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान निम की विशेषज्ञता को देखते हुए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं पुलिस के जवानों को भी निम में आपदा प्रबंधन तथा खोज एवं बचाव के गुर सिखाए जा रहे हैं। निम की टीम एवरेस्ट समेत तीन दर्जन से अधिक हिमशिखरों पर तिरंगा लहरा चुकी है।
निम से निकले हैं कई प्रख्यात पर्वतारोही
निम से प्रशिक्षण पाए लोगों ने भी पर्वतारोहण के क्षेत्र में देश-दुनिया में खूब नाम कमाया है। प्रथम भारतीय महिला एवरेस्टर सुश्री बछेंद्री पाल के साथ ही सुश्री चंद्रप्रभा ऐतवाल, संतोष यादव, डा. हर्षवंती बिष्ट, कृष्णा पाटिल, ताशी-नुंग्शी, अरुणिमा सिन्हा, अर्जुन वाजपेई आदि ख्यातिप्राप्त पर्वतारोहियों ने निम से ही पर्वतारोहण का ककहरा सीखा।
एवरेस्ट पर सफल आरोहण कर चुके कुशाल राणा, दशरथ रावत, विनोद गुसाईं, सूबेदार मेज तेजपाल, सूबेदार कुंवर सिंह आदि निम में प्रशिक्षक के तौर पर कार्यरत हैं।
पर्वतारोहण प्रशिक्षण के विश्व स्तरीय मानकों के चलते निम का देश-दुनिया में अलग स्थान है। इस वर्ष को गोल्डन जुबली वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। पर्वतारोहण प्रशिक्षण के अलावा हमें आपदा के दौरान यात्रियों को सुरक्षित निकालने, केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण, नंदा देवी राजजात आयोजन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई, जिसे हमने सफलता के साथ पूरा किया। - कर्नल अजय कोठियाल, प्रधानाचार्य निम उत्तरकाशी।