मोरी ब्लॉक में सतलुज जल विद्युत निगम की ओर से निर्माणाधीन एक परियोजना में पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति से अधिक पेड़ों के काटे जाने का मामला सामने आया है। इस पर विभिन्न सामाजिक संगठनों ने रोष व्यक्त कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मोरी ब्लाक के सांद्रा रेंज के कक्ष संख्या 3 व 4 में हजारों चीड़ के पेड़ों का दोहन किया गया है। सतलुज जल विद्युत निगम की ओर से निर्माणाधीन नेटवाड़ मोरी 60 मेगावाट की परियोजना का यहां पावर हाउस का निर्माण किया जा रहा है। पावर हाउस की मिट्टी के लिए नैटवाड़ के पास डंपिंग जोन बनाया गया है। पावर हाउस से डंपिंग जोन तक निगम की ओर से साढ़े चार किमी मोटर मार्ग का निर्माण किया जाना है।
मोटर मार्ग निर्माण के लिए केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने 1760 पेड़ों के काटने की स्वीकृति निगम को दी है, लेकिन यहां निर्माणाधीन पावर हाउस के ऊपर हजारों पेड़ काटे गए हैं। मोटर मार्ग के लिए भी पेड़ों का कटान किया जा रहा है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजपाल रावत ने इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि सतलुज जल विद्युत निगम व वन विभाग की मिली भगत से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
माटू जन संगठन के विमल भाई ने कहा कि स्वीकृति से अर्थिक पेड़ों का काटा जाना पर्यावरण मंत्रालय के नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने मामले की जांच कर वन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। सतलुज जल विद्युत निगम के वरिष्ठ अधिकारी कमलेश भारद्वाज ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय से स्वीकृत पेड़ ही काटे गए हैं। पेड़ों के छपान व कटान का कार्य वन विभाग व वन निगम कर रहा है। डीएफओ आकाश कुमार वर्मा ने बताया कि अगर ऐसा है, तो दोबारा पेड़ों की संख्या का सत्यापन किया जाएगा ।