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एक बच्ची की दर्दनाक मौत से उठ रहे हैं कई सवाल

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विकास भवन परिसर में लावारिस खड़े वाहन के भीतर मंगलवार देर रात बालिका की जलकर हुई मौत ने सरकारी तंत्र की व्यवस्थाओं और समाज की सजगता एवं संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भले ही पुलिस ने इसे लापरवाही से हुआ एक हादसा बताकर मामले का निस्तारण कर दिया है, लेकिन हादसे के कारण और हालात को लेकर कई सवालों का किसी के पास ठोस जवाब नहीं है।
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कड़ाके की ठंड में पांच नाबालिग बच्चे देर रात लावारिस हालत में अपनी परिजनों से दूर भटक रहे थे, लेकिन किसी ने उनकी ओर ध्यान क्यों नहीं दिया? पुलिस के अधिकारी और बाल कल्याण समिति एवं चाइल्ड हेल्प लाइन के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह बच्चे पूर्व में भी कई बार अपने घर से भाग चुके हैं और उन्हें पकड़कर परिजनों के सुपुर्द किया गया, तो फिर इस मामले में पूर्व में कोई ठोस कार्रवाई कर बच्चों का पुनर्वास क्यों नहीं किया गया? ठंड से बचने के लिए कहीं कोई आश्रय स्थल नहीं होने के कारण ही बच्चों ने लावारिस खड़े वाहन में शरण ली। इस दौरान आसपास की बस्ती में रहने वालों ने इन बच्चों की सुध क्यों नहीं ली? पुलिस या बाल कल्याण समिति को इसकी सूचना क्यों नहीं दी? वाहन में आग लगने पर झुलसते हुए बालिका ने चीत्कार किया होगा, तो आसपास मौजूद लोगों ने उसकी आवाज को अनसुना क्यों किया? घटना स्थल से महज दस मीटर की दूरी पर जिला कोषागार में सुरक्षा कर्मी तैनात थे। समय रहते उन्हें इस घटना का पता क्यों नहीं चला? जिला कोषागार एवं विकास भवन परिसर वाले इस क्षेत्र में सुरक्षा एवं निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था क्यों नहीं है?
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