कम बर्फबारी और समय पर ठंड नहीं होने से उड़ गई है भालू की नींद
उत्तरकाशी। प्रभागीय वनाधिकारी डीपी बलूनी ने कहा कि पहाड़ों में भालुओं का जीवन चक्र बदल गया है। कम बर्फबारी और समय पर ठंड नहीं होने से भालू की नींद उड़ गई है। पहले की तरह न तो भालू को आसानी से भोजन मिल रहा है और न ही उसके आवास स्थल ही सुरक्षित रह गए हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का भरपूर असर भालुओं पर सीधे तौर से दिखाई देने लगा है।
शुक्रवार को कोटबंगला स्थित वन कार्यालय में पत्रकार वार्ता में डीएफओ बलोनी ने कहा कि नवंबर तक हाइबरनेशन में चले जाने वाले भालू इस बार पहाड़ी इलाकों में सक्रिय देखे जा रहे हैं। कम बर्फबारी और ठंड में देरी के कारण भालू अब भी जगे हुए हैं जिससे उनकी आक्रामकता बढ़ गई है। जिले में अब तक भालू नौ लोगों पर हमला कर चुका है जिसमें दो लोगों की मृत्यु होने के साथ ही चार गंभीर व तीन घायल हुए हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी जिले में सर्वाधिक घटनाएं भटवाड़ी ब्लॉक में देखने को मिली है। कई गांव में भालू इंसानों और मवेशियों पर हमला कर रहे हैं। हालात इतने चिंताजनक हैं कि वन विभाग की टीम निरंतर गश्त कर रही है। सोशल मीडिया में अफवाह फैलाई जा रही है कि वन विभाग ने क्षेत्र में मैदानी इलाकों से भालू लाकर छोड़े हैं जो सरासर भ्रामक है।
उन्होंने कहा कि हिमालय क्षेत्र में 1500 से 3500 तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भालू हैं। भालुओं से आम जन की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने स्थिति पर निगरानी बढ़ा दी है। वनकर्मी नियमित गश्त कर रहे हैं। भालू के हमलों को रोकने के लिए 22 एनडीआईआर सेंसर यंत्र मंगाए गए हैं जिन्हें जल्द ही संभावित क्षेत्रों में स्थापित किया जाएगा।