दो दशकों से लंबित निष्प्रयोज्य पड़ी चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी के दिन बहुरने के आसार हैं। इसे हवाई अड्डे के तौर पर विकसित करने का कार्य अंतिम चरणों में है। सब कुछ ठीक रहा तो इस साल यहां व्यवसायिक उड़ानें शुरू हो जाएगी। ऐसा हुआ तो क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे।
वर्ष 1992-93 में नागरिक उड्डयन विभाग ने चिन्याली गांव में 776 नाली जमीन खरीद कर हवाई पट्टी का निर्माण किया था। 23 मीटर चौड़ी और 1165 मीटर लंबी हवाई पट्टी निर्माण के दो दशक बाद भी निष्प्रयोज्य पड़ी है। इस बीच आपदा के दौरान यहां हेलीकॉप्टर उतरने के अलावा कई बार हवाई जहाज की ट्रायल लैडिंग तो हुई, लेकिन व्यवसायिक उपयोग शुरू नहीं हो पाया था। ट्रायल के दौरान आई खामियों को दूर करने के लिए नागरिक उड्डयन विभाग ने इस हवाई पट्टी के रन-वे को और चौड़ा करने का निर्णय लिया।
वर्ष 2013 में हवाई पट्टी के विस्तारीकरण के लिए 38 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ। कार्यदायी संस्था उत्तरप्रदेश निर्माण निगम ने अब हवाई पट्टी के रन-वे को तीस मीटर चौड़ा बना दिया है। साथ ही यहां एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) टावर, टर्मिनल, एप्रिन, एप्रोच रोड, अग्निशमन केंद्र आदि का निर्माण भी कराया गया है। सोमवार को हवाई अड्डे के निरीक्षण पर पहुंचे निगम के परियोजना प्रबंधक पीके शर्मा ने बताया कि हवाई अड्डे के नब्बे फीसदी कार्य पूरे हो चुके हैं। शेष कार्य मार्च माह तक पूरे कर लिए जाएंगे।
कोट...
चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे का निर्माण कार्य पूरा होने को है। जल्द ही इसका व्यवसायिक उपयोग शुरू करने के लिए शासन स्तर पर कार्ययोजना तैयार की जाएगी। आपदा प्रबंधन, पर्यटन एवं सामरिक दृष्टि से यह हवाई अड्डा महत्वपूर्ण साबित होगा।
अमित नेगी, सचिव नागरिक उड्डयन।