टिहरी बांध की झील से हो रहे कटाव के कारण चिन्यालीसौड़ नेरी जोगत मोटर मार्ग में भूस्खलन सक्रिय है, जो 42 से ज्यादा गांवों के लिए मुसीबत बन गया है। भूस्खलन से परेशान नेरी के ग्रामीणों ने दिकोली छानियों में रहना शुरू कर प्रशासन से गांव के पुनर्वास की मांग की।
वर्ष 2013 में निरंतर भूस्खलन सक्रिय रहने से छह माह तक पूरी तरह बंद रहे मोटर मार्ग के कारण 55 परिवार के नेरी गांव के लोगों ने डेढ़ किमी नीचे दिकोली में बनी छानियों में रहना शुरू किया। छानी और गांव में खेती होने से ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर भूस्खलन क्षेत्र पर कर गांव पहुंचना पड़ रहा है। बाजार के लिए भी गांव वालों को दस किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है।
चिन्यालीसौड़ पुल के झील में डूबने और कम पानी से बाहर आने पर यहां वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहती है। नेरी गांव के पैरा लीगल वालेनटियर हरीश थपलियाल, जिला पंचायत सदस्य जोगेंद्र सिंह रावत, प्रधान जयमाला देवी ने डीएम को पत्र भेजकर समस्या के निराकरण की मांग की है।
80 प्रतिशत परिवारों को गांव छोड़ कर दिखोली छानियों में शरण लेनी पड़ रही है। लोगों ने भू वैज्ञानिकों से गांव का सर्वेक्षण भी कराया, लेकिन उसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई। ऐसे में गांव का पुनर्वास होना जरूरी है।