नैटवाड़ के लोगों ने शुरू किया धरना-प्रदर्शन
ग्रामीणों ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए की नारेबाजी
पुरोला। मोरी सतलुज जल विद्युत परियोजना के नैटवाड़ स्थित बैराज निर्माण में अधिग्रहित भूमि के मुआवजे सहित विभिन्न लंबित मांगों के समाधान को लेकर ग्रामीणों ने मंगलवार से दोबारा धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। परियोजना प्रबंधन और प्रशासन के आश्वासनों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने पर ग्रामीणों ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए नारेबाजी की।
करीब एक माह पूर्व बैराज निर्माण में अधिग्रहित भूमि का मुआवजा सहित अन्य मांग को लेकर नैटवाड़ और गैंचवाण गांव के प्रभावित परिवारों ने बैराज स्थल पर धरना दिया था। ग्रामीण खेती की सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक कार्य, चरान-चुगान पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने और बैराज से टौंस नदी पार स्थित कृषि भूमि तक पुल संपर्क उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
उस समय परियोजना प्रबंधन और प्रशासन ने शीघ्र समाधान का आश्वासन देकर धरना स्थगित करा दिया था लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने पर ग्रामीणों ने फिर से धरना शुरू किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मोरी में टौंस नदी पर बनी सतलुज जल विद्युत परियोजना के बैराज निर्माण के लिए नैटवाड़ के काश्तकारों की लगभग 27 हेक्टेयर कृषि भूमि अधिग्रहित की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि दो वर्ष पूर्व परियोजना का निर्माण पूरा होने के बाद जेपी कंपनी ने परियोजना का हस्तांतरण कर दिया लेकिन आज तक प्रभावित किसानों को न तो भूमि का मुआवजा मिला और न ही अन्य वादों को पूरा किया गया। मांग पूरी न होने तक ग्रामीणों को धरना जारी रखने की बात कही। धरना देने वालों में ग्राम प्रधान संदीप रांगड़, मछिंद्रनाथ, अतर सिंह, शूरवीर रावत, विजयपाल, जगत सिंह, राजेंद्र सिंह रांगड़, सतीश सिंह, प्रताप सिंह, गोविंद सिंह, उपेंद्र सिंह रावत आदि शामिल रहे।