कोविड महामारी से निपटने के लिए सिर्फ सरकारी तंत्र पर निर्भर रहने के बजाय लोगों को स्वयं भी जागरूक होने की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की लापरवाही से कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए हिमालय पर्यावरण जड़ी बूटी एग्रो संस्थान जाड़ी ने ठांडी और जालंग गांव में कोविड निगरानी समिति का गठन किया है। यह समिति जिला प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सेतु का कार्य करेगी।
जाड़ी संस्था ने उत्तरकाशी आपदा प्रबंधन जनमंच और कासा संस्था के सहयोग से डुंडा प्रखंड के ठांडी और जालंग गांव में कोविड निगरानी समिति का गठन किया है। ठांडी में केशर पंवार, भूपेंद्र सेमवाल, प्रवेश बिष्ट, आशीष सेमवा, प्रमोद डबोला एवं अब्बल सिंह राणा तथा जालंग भरदार में गजेंद्र राणा, यशवीर बिष्ट, सुंदर सिंह राणा, दर्मियान सिंह एवं वीरेंद्र राणा को निगरानी समिति का सदस्य बनाया गया है। यह समिति गांव में कोविड के लक्षण वाले लोगों को चिहिृृत कर उनकी जांच कराने, टीकाकरण कराने, कोविड नियमों के साथ ही होम आइसोलेशन और होम क्वारंटीन के नियमों का पालन कराएगी। इस संबंध में वह प्रशासन से सूचनाएं साझा कर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच सेतु का कार्य करेगी। जाड़ी संस्था के सचिव द्वारिका सेमवाल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड के लक्षण होने के बावजूद लोग जांच नहीं करा रहे हैं। साथ ही शादी विवाह आदि समारोहों में भी मानक से अधिक भीड़ एकत्र हो रही है। जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है। संवाद