यमुनोत्री सीट पर भाजपा ने अब केदार सिंह रावत पर कमल खिलाने का दांव खेला है। राज्य विधानसभा के लिए हुए पिछले तीन चुनावों में पार्टी को इस सीट से मुंह की खानी पड़ी है।
दरअसल अभी तक उत्तराखंड में हो चुके तीन विधानसभा चुनाव में यमुनोत्री सीट पर कांग्रेस और यूकेडी का ही बोलबाला रहा है। कांग्रेस के टिकट पर यहां अभी तक केदार सिंह रावत और यूकेडी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले प्रीतम पंवार ही चुनाव जीते हैं। 2002 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यमुुनोत्री सीट से विमला नौटियाल को टिकट दिया था। उन्हें आठ हजार से भी कम मत मिले। 2007 के विस चुनाव में भाजपा ने यहां सुलोचना गौड़ को अपना प्रत्याशी घोषित किया था।
तब भी भाजपा को इस सीट पर मुंह की खानी पड़ी और सुलोचना गौड़ को सात हजार से भी कम मत हासिल हुए। 2012 में भाजपा ने जगवीर सिंह भंडारी को यमुनोत्री सीट से प्रत्याशी बनाया। इस बार भाजपा की स्थिति सुधरी और 11968 मत हासिल कर जगवीर सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे। ऐसे में अब भाजपा ने इस सीट को कब्जाने के लिए केदार सिंह रावत पर दांव खेला है।
केदार सिंह रावत 2007 में कांग्रेस के टिकट पर यमुुनोत्री से चुनाव जीत चुके हैं, जबकि 2002 और 2012 में वे करीबी अंतर से पिछड़कर दूसरे नंबर पर रहे थे। इससे पहले केदार सिंह रावत भाजपा में ही थे। 1993 और 1996 में केदार सिंह उत्तर प्रदेश के समय उत्तरकाशी जिले से भाजपा के जिलाध्यक्ष थे।
1996 में भाई राजेंद्र सिंह रावत को भाजपा द्वारा लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिए जाने पर केदार रावत पार्टी से नाराज हो गए और कांग्रेस में शामिल हो गए थे। अब 20 साल बाद भाजपा में उनकी घर वापसी हुई है। अब यह देखना है कि क्या केदार सिंह भाजपा के यमुनोत्री सीट पर कमल खिलाने का सपना साकार कर पाते हैं या नहीं।
यमुनोत्री सीट पर इस प्रकार रहा केदार का दबदबा-
2002 विधानसभा चुनाव में यमुनोत्री सीट पर यूकेडी के टिकट पर प्रीतम सिंह पंवार 9498 वोट लेकर विधायक बने थे, जबकि 7013 वोट लेकर केदार सिंह रावत कांग्रेस के टिकट पर दूसरे स्थान पर रहे थे। 2007 के चुनाव में केदार सिंह रावत को कांग्रेस ने एक बार फिर टिकट दिया और उन्होंने 14,484 वोट हासिल कर यमुनोत्री सीट से जीत हासिल की थी।
इस बार प्रीतम सिंह पंवार 11156 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे। 2012 में प्रीतम सिंह पंवार ने एक बार फिर से यूकेडी के टिकट पर 15,909 वोट पाकर यमुनोत्री सीट को जीता था। उस समय केदार सिंह रावत कांग्रेस के टिकट पर 13,313 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे।