पालीगाड के यमुनोत्री हाईवे पर कुछ इस तरह से आवाजाही करते छोटे वाहन।
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कमल नदी में आए उफान में अस्थायी पुलिया बहने से थली गांव के ग्रामीणों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। टमाटर की फसल बाजार पहुंचाने के लिए ग्रामीण दो किमी अतिरिक्त पैदल दूरी तय करने को मजबूर हैं। अस्थायी पुलिया बहने से ग्रामीण जिला पंचायत की जर्जर पुलिया से आवागमन करने को मजबूर हैं।
बता दें कि नौगांव के थली गांव के ग्रामीणों की कृषि भूमि साड़ा तोक में है। खेतीबाड़ी करने के साथ ही ग्रामीण साल के छह महीने यहीं निवास करते हैं। तोक को ब्लाक मुख्यालय से जोड़ने के लिए कोई स्थायी पुल नहीं होने के कारण हर साल ग्रामीण लकड़ी डालकर अस्थायी पुलिया तैयार करते हैं, जो हर साल बरसात में कमल नदी में उफान आने पर बह जाती है।
इस बार भी अस्थायी पुलिया रविवार को नदी के उफान में बह गई है। अब ग्रामीणों के समक्ष खेतों में तैयार टमाटर की फसल को बाजार तक पहुंचाने की समस्या खड़ी हो गई है। फिलहाल ग्रामीण दो किमी अतिरिक्त पैदल दूरी तय कर अपनी फसल मंडियों में पहुंचा रहे हैं, लेकिन इस रास्ते पर स्यूली में दो दशक पहले जिला पंचायत द्वारा बनवाई गई पुलिया जर्जर हो गई है। पुलिया के दोनों ओर के एबटमेंट की दीवारें खोखली होकर ढहने को हैं। पुलिया के किनारे लगी रेलिंग पूरी तरह टूट चुकी है।
थली गांव के कृपाल सिंह राणा, जयवीर सिंह का कहना है कि ग्रामीण वर्षों से साड़ा तोक में पुलिया निर्माण की मांग कर रहे हैं। अब वैकल्पिक रास्ते पर बनी पुलिया भी जर्जर होकर ढहने को है। उन्होंने जिला पंचायत से शीघ्र पुलिया को दुरुस्त कर सुरक्षित आवाजाही लायक तैयार करने की मांग की है।