सचल चिकित्सा वाहन से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की सरकार की योजना दो साल से ठप पड़ी है। करीब डेढ़ करोड़ रुपये लागत का सचल चिकित्सा वाहन लोनिवि परिसर में जंक खा रहा है।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्ष 2010 में सचल चिकित्सा वाहन से दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की योजना शुरू हुई थी।
अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं से लैस सचल चिकित्सा वाहन सड़क मार्ग से लगे दूरस्थ गांवों तक पहुंचा कर इसमें तैनात चिकित्सकों की ओर से मौके पर ही मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण, जांच एवं उपचार किया जाता था। करीब डेढ़ करोड़ लागत के वाहन में अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, पैथोलॉजी आदि की सुविधा थी।
जून 2013 की आपदा में सड़कें तबाह होने के बाद यह सेवा ठप हो गई थी। फिर दिसंबर 2013 में अनुबंध समाप्त होने के बाद से सचल चिकित्सा वाहन बेकार खड़ा है। दो साल से अनुबंध का नवीनीकरण नहीं होने से करोड़ों का सचल चिकित्सा वाहन लोनिवि परिसर में खड़ा जंक खा रहा है। असी गंगा घाटी के पारेश्वर प्रसाद, संतोष खंडूड़ी ने सुविधा दोबारा शुरू करने की मांग की है।
कोट...
जून 2013 की आपदा में सड़क क्षतिग्रस्त होने के बाद सचल चिकित्सा वाहन सेवा ठप पड़ गई थी। दिसंबर 2013 में संचालक संस्था के साथ अनुबंध समाप्त हो गया था। इसके बाद निदेशालय को दोबारा अनुबंध करने के लिए पत्र लिखा गया है। आदेश मिलने के बाद शुरू की जाएगी।
डा. ज्ञानेंद्र रावत, सीएमओ उत्तरकाशी।