इसके बाद हरकीदून प्रोटेक्शन एंड माउंटेनियरिंग एसोसिएशन का कार्यालय खोला, जिसमें पीजी कॉलेज में पढ़ने वाले मोरी क्षेत्र के युवाओं को जोड़ा। इसके बाद पूरा ध्यान मोरी क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र में प्रसिद्ध करने पर लगाया।
टीम के साथ चाईंशील, देवक्यारा, सरुताल आदि नए ट्रैक रूट खोजे और साथ ही सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा दिया। आज स्थिति यह है कि मोरी क्षेत्र में हर साल 50 हजार से अधिक पर्यटक पहुंच रहे हैं। मुझसे जुड़े कई युवाओं ने अपनी अलग ट्रैकिंग एजेंसी खोल ली हैं। मोरी क्षेत्र में ही करीब 20 एजेंसियां चल रही हैं।
जिससे सांकरी, कासला, लिवाड़ी, फिताड़ी, सिरगा, ढाटमीर, ओसला आदि दूरस्थ गांवों के तीन-चार हजार ग्रामीणों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। पर्यटन उद्योग में सफलता मिलने के बाद मैंने समाज सेवा के उद्देश्य से हरकीदून पब्लिक स्कूल भी खोला। जहां आसपास के गांवों के 90 बच्चे पढ़ते हैं। जिनमें से 50 प्रतिशत से अधिक गरीब परिवार के बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। मेरी सफलता का सारा श्रेय माता-पिता व चाचा के साथ ही डॉ. हर्षवंती बिष्ट व कर्नल अशोक अबे को जाता है।