जल विद्युत निगम ने जून 2013 की आपदा के बाद से बंद पड़ी 2.25 मेगावाट की पिलंगगाड लघु जल विद्युत परियोजना को दुरुस्त कराने की सुध तो ली, लेकिन विशेष डिजाइन तैयार करने के बजाय पुराने डिजाइन पर ही कार्य शुरू किया गया है। स्थिति यह है कि मरम्मत पर इसकी निर्माण लागत से ज्यादा बजट खर्च किया जा रहा है।
वर्ष 2004 में 8.90 करोड़ रुपये लागत से परियोजना का निर्माण किया गया। तब इस बजट में टरबाइनों के साथ ही विद्युत गृह, 1300 मीटर लंबी पावर चैनल, ट्रैंच वियर, डिस्ल्टिंग टैंक, स्विच यार्ड, ग्रिड से जोड़ने की लाइन, एप्रोच रोड, पुल एवं कालोनी का निर्माण किया गया था। अब बाढ़ में बही महज 220 मीटर पावर चैनल, ट्रैंचवियर और डिसिल्टिंग टैंक पर ही 11.25 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं।
चालू होने से जून 2013 की आपदा में ठप पड़ने तक यह परियोजना 40 करोड़ से ज्यादा कीमत की बिजली का उत्पादन कर चुकी थी। दुरुस्त हालत में इससे सालाना 12 मिलियन यूनिट उत्पादन हो रहा था और यह बिजली ऊर्जा निगम को 2.55 रुपये यूनिट की दर से बेची जा रही थी। तीन साल से ठप पड़ी इस परियोजना में अभी तक नौ करोड़ से अधिक की उत्पादन हानि हो चुकी है।
स्थिति यह है कि परियोजना की मरम्मत पुरानी डिजाइन पर ही कराई जा रही है, जबकि हेड बदल चुका है। यहां नदी का स्पान 55 मीटर हो गया है। पहले यहां 24 मीटर लंबा ट्रैंच वियर था। ठेकेदार का कहना है कि उन्हें डिजाइन नहीं मिला और इस दिसंबर तक काम पूरा करना है।
बाढ़ के बाद परियोजना के हेड की बदली स्थिति में ठेकेदार ने अपनी ड्राइंग से काम करने की बात कही थी। अभी तक नई ड्राइंग न मिलने पर अब पुरानी ड्राइंग सौंपकर काम करने को कहा है। इस माह से कार्य को गति दी जाएगी।
अजय पटेल, महाप्रबंधक जल विद्युत निगम।